दो जुलाई को पूर्व आईजी एस.आर. दारापुरी ने एक बयान जारी कर बताया था कि 3 जुलाई को दोपहर 2 बजे से उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब में ‘सहारनपुर/कुशीनगर हो या ऊना : जातिवाद से नहीं समझौता’ विषयक संगोष्ठी आयोजन करने जा रहे हैं। उन्होंने गुजरात के 45 लोगों को झांसी में ट्रेन से उतार कर पुलिस हिरासत में लेने की भी निंदा की थी। उनका कहना था कि यह दलितों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का खुला हनन है।
सोमवार को वह प्रेस क्लब में संगोष्ठी करने के लिए आए थे, तभी पुलिस ने दारापुरी व दीक्षित समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। सभी को पुलिस लाइन ले जाया गया है।
उधर पूर्व आईपीएस ने ट्वीट कर अपनी गिऱफ्तारी की खबर दी। उन्होंने ट्वीट किया कि उनके लखनऊ पुलिस ने आठ लोगों को प्रेस क्लब से गिरफ्तार कर लिया है।
वहीं पुलिस अधीक्षक पूर्वी विकास चंद्र त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दारापुरी बुंदेलखंड दलित सेना से जुड़े हुए थे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले थे। इसलिए पुलिस ने कार्रवाई की। उनके पास इसके लिए कोई अनुमति नहीं थी।
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