पार्टी के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने अपने बयान में कहा, “सूबे के मुख्यमंत्री और राज्य निर्वाचन आयोग के अलग-अलग बयानों से साफ हो गया है कि प्रदेश के निकाय चुनावों को टालने की साजिश चल रही है। मुख्यमंत्री वोटरलिस्ट की गड़बड़ियों को दुरुस्त करने ओर ओबीसी सर्वे को फिर से कराने का बहाना ले रहे हैं तो राज्य निर्वाचन आयोग खराब कानून-व्यवस्था का सहारा ले रहा है। लेकिन, इन दोनों बातों की जिम्मेदार तो राज्य सरकार ही है।”
भाकपा ने आरोप लगाया, “मोदी सरकार के तीन साल और योगी सरकार के दो माह के कार्यकाल की कलई खुल चुकी है। भाजपा यह जान चुकी है कि जिस छल से उसने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बहुमत हथिया लिया, अब वह दोबारा चलने वाला नहीं है। इससे बचने के लिए वह वोटरलिस्ट और वार्डो के आरक्षण के आधार को बदलना चाहती है। इसी कृत्य के लिए वह चुनावों को टाल रही है। सर्व सत्ताहरण की भाजपा की यह साजिश लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।”
डा. गिरीश ने कहा कि जब सपा और बसपा की सरकारों ने निकाय चुनावों को टाला था, भाकपा ने तब भी उसका विरोध किया था और आज भी वह इस कार्रवाई की विरोधी है।
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