इलाहाबाद, 13 जून (आईएएनएस/आईपीएन)। भरतीय जनता पार्टी ने इलाहाबाद में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उप्र विधानसभा चुनाव का एजेंडा तय कर लिया है। पश्चिमी उप्र में कैराना तो पूर्वी उप्र में गंगा सफाई अभियान के जरिए जनता को भाजपा से जोड़ने की तैयारी है। कहना गलत न होगा कि दोनों मुद्दों के जरिए भाजपा लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ना चाहती है।
इलाहाबाद, 13 जून (आईएएनएस/आईपीएन)। भरतीय जनता पार्टी ने इलाहाबाद में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उप्र विधानसभा चुनाव का एजेंडा तय कर लिया है। पश्चिमी उप्र में कैराना तो पूर्वी उप्र में गंगा सफाई अभियान के जरिए जनता को भाजपा से जोड़ने की तैयारी है। कहना गलत न होगा कि दोनों मुद्दों के जरिए भाजपा लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ना चाहती है।
खास बात यह है कि इसमें मुख्य भूमिका संगठन की ही होगी, केंद्र सरकार की भूमिका को वेट एंड वाच तक सीमित रखा जाएगा। कैराना का मामला कार्यसमिति में अचानक नहीं उठा, बल्कि इसकी रणनीति पहले से ही तय थी।
यही वजह रही कि भाजपा सांसद हुकुम सिंह के जरिए इस मामले को तूल दिया गया और कार्यसमिति में इसे शामिल करके उप्र सरकार पर सीधा हमला बोला गया। बिसाहड़ा कांड से मिली आक्सीजन अब कैराना में खर्च की जानी है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद का दावा है कि भाजपा सांप्रदायिकता की राजनीति नहीं करती है लेकिन हालिया घटनाक्रम से साफ है कि उप्र में वह पूरी तरह वोटों का ध्रुवीकरण करना चाहती है।
तमाम बंदिशों के बावजूद रविवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्थानीय संतों से मुलाकात से साफ हो गया कि गंगा की सफाई भाजपा के लिए महज एक अभियान नहीं, बड़ा चुनावी मुद्दा भी है। मालूम हो कि मोदी ने लोकसभा चुनाव वाराणसी से यह कहकर लड़ा था कि मुझे तो गंगा मां ने बुलाया है। अब इस बात को नए कलेवर में पेश किया जाना है। इस बार संगम नगरी इसका गवाह बनेगी। पश्चिम से ज्यादा पूर्वी यूपी के जनमानस में गंगा का महत्व ज्यादा है। भाजपा अगर अपने इस फार्मूले को धरातल पर सफल बना पाती है तो इसे उप्र की राजनीति में नये प्रयोग के रूप में देखा जाएगा।
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