लखनऊ, 11 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 11 सीटों के लिए शनिवार सुबह मतदान शुरू हो गया। विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में बड़े पैमाने पर हुई क्रॉस वोटिंग की आशंका से सभी राजनीतिक दलों की नींद उड़ी हुई है।
एमएलसी चुनाव की ही तर्ज पर राज्यसभा के लिए भाजपा समर्थित प्रीति महापात्रा को हराने के लिहाज से गैर भाजपाई दल देर रात तक अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे रहे।
दूसरी ओर, विधान परिषद में भाजपा के दूसरे प्रत्याशी दया शंकर सिंह की हार के बाद प्रीति के वोट प्रबंधक परेशान नजर आ रहे हैं। उधर, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के देर रात तक पत्ते न खोलने की वजह से कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकार भी उलझन में दिखाई दिए।
गौरतलब है कि राज्यसभा की 11 सीटों के लिए 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। राज्यसभा चुनाव के एक दिन पहले हुए एमएलसी चुनाव में जमकर क्रॉस वोटिंग हुई। क्रॉस वोटिंग में गैर भाजपा दलों की रणनीति कामयाब रही और सारे जतन करने के बावजूद भाजपा अपने दूसरे प्रत्याशी दयाशंकर सिंह को नहीं जिता सकी।
ऐसी ही रणनीति राज्यसभा के चुनाव में भी नजर आने के आसार हैं। लिहाजा, सभी दल अपने-अपने राज्यसभा प्रत्याशियों को चुनाव जिताने की रणनीति में जुट गए हैं। शीर्ष नेताओं ने विधायकों के साथ डिनर पर रणनीति बनाई।
राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने भाजपा को हराने और सपा व कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के लिए व्हिप जारी कर दिया है। रालोद के पास आठ वोट हैं। उसने इसमें से सात वोट सपा प्रत्याशियों को, जबकि एक वोट कांग्रेस के कपिल सिब्बल को देने का फैसला किया है।
बसपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए दो प्रत्याशियों, सतीश चंद्र मिश्र और अशोक सिद्घार्थ को उतारा है जबकि भाजपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री शिव प्रताप शुक्ल को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है।
सपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा, समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह, इलाहाबाद के दिग्गज नेता कुंवर रेवती रमण सिंह सहित सात लोगों को चुनावी मैदान में उतारा है।
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