नमाज से पहले और बाद में मजिस्दों में मौलानाओं ने तकरीर की, जिसमें मुसलमान भाइयों से दूसरे मजहब के लोगों के साथ भाईचारा कायम रखने की बात पर जोर दिया गया।
इस दौरान देश में दंगा फैलाने वालों की बातों से दूर रहने के लिए कहा गया। किसी अफवाह पर गौर नहीं करने की बात कही गई। कहा गया कि कुछ लोग अपने मतलब के लिए फसाद फैलाते हैं। ऐसे फिरकापरस्तों से दूर रहने की जरूरत है। किसी तरह की अफवाह पर कतई गौर न करें।
परंपरा के मुताबिक, इसे अलविदा जुमा कहा जाता है। उम्मीद की जा रही है कि 6 या 7 जुलाई को ईद के चांद का दीदार हो सकता है।
शुक्रवार को अलविदा की नमाज पूरे अकीदत व एहतराम के साथ जिले भर की मस्जिदों में अदा की गई। वैसे तो इस्लाम में हर नमाज और हर जुमे की अहमियत है, लेकिन रमजान का आखिरी जुमा खास ही होता है। अलविदा का मतलब है किसी चीज के रुखसत होने का यानी रमजान हमसे रुखसत हो रहा है। इसलिए इस मौके पर जुमे में अल्लाह से खास दुआ की जाती है कि आने वाला रमजान हम सब को नसीब हो।
रमजान की बरकतें व रहमतें हर महीनों से ज्यादा होती हैं। इस पाक महीने के 30 दिन खत्म होने के बाद ईद का त्योहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
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