लखनऊ, 9 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में नए लोकायुक्त की नियुक्ति का मामला उलझता जा रहा है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने राज्यपाल राम नाइक को पत्र लिखकर कहा है कि लोकायुक्त के लिए न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह के नाम पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहमत नहीं थे। उनके इस पत्र के बाद अब राज्य सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से लिखे गए इस पत्र को राज्यपाल ने मुख्यमंत्री और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजा है। मौर्य ने राज्यपाल को इस बाबत पत्र लिखने की पुष्टि की है।
विपक्ष के इस नेता की ओर से लिखे गए पत्र के बाद 19 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली लोकायुक्त मामले की सुनवाई में यूपी सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
राजभवन सूत्रों के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य ने पत्र में लिखा है, “लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर चयन समिति की जो बैठक हुई थी, उसमें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के साथ मैं भी था। बैठक में सेवानिवृत्त जस्टिस वीरेंद्र सिंह के नाम पर चर्चा नहीं हुई थी। मीटिंग में नए लोकायुक्त के लिए चीफ जस्टिस ने जस्टिस मित्तल का नाम सजेस्ट किया था।”
मौर्य ने लिखा है, “मैंने उस समय ये कहा था कि नए लोकायुक्त के लिए सीएम और चीफ जस्टिस की जिस नाम पर सहमति होगी, वो नाम मुझे भी मंजूर होगा।”
इस बीच, स्वामी प्रसाद मौर्य के इस पत्र को लेकर उप्र के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि अब यह बात स्वामी प्रसाद ही बता सकते हैं कि जो उन्होंने दस्तखत किए हैं, वो सही हैं, या फिर वह जो बोल रहे हैं वह सही हैं।
गौरतलब है कि यूपी में लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में 19 जनवरी को सुनवाई होनी है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह यादव को सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर को उप्र का लोकायुक्त नियुक्त किया था। वीरेंद्र सिंह को 20 दिसंबर को शपथ लेनी थी। इसी बीच हालांकि इस मामले में याचिका दायर होने के बाद खुद सर्वोच्च न्यायालय ने ही उनके शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगा दी थी।
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