महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लाल जी प्रसाद निर्मल ने कहा, “न्याय विभाग द्वारा 201 सरकारी वकीलों की सूची निर्गत की गई है, जिसमें अनुसूचित जाति के वकीलों की संख्या मात्र एक है। उप्र आरक्षण अधिनियम 1994 के आधार पर अनुसूचित जाति के सरकारी वकीलों की संख्या 46 होनी चाहिए।”
महासभा का कहना है कि जब अनुसूचित जाति के सरकारी वकील नहीं बनंेगे तो वे जज की कुर्सी तक कैसे पहुंचेंगे।
डॉ. निर्मल ने कहा है कि सरकार के गठन में दलितों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, फिर उन्हें सरकारी वकीलों की नियुक्ति में भागीदारी क्यों नहीं दी जा रही है।
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