जवाब में सरकार ने इसके लिए भारत सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि सरकार प्राकृतिक गैस पर अतिरिक्त कर समाप्त करेगी तो राज्य के राजस्व में काफी हानि होगी।
खास बात यह है कि इस मसले पर संसदीय कार्य मंत्री ने बसपा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यूरिया हांथी के इस्तेमाल की चीज नहीं है। वहीं बसपा ने भारत सरकार का हवाला देकर राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। ऐसे में नेता विरोधी दल स्वामी प्रसाद मौर्य सरकार पर किसानांे के साथ धोखा देने का आरोप लगाया और अपने दल के विधायकों के साथ बहिर्गमन कर गए।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक श्यामदेव राय चौधरी ने मुख्यमंत्री से जानना चाहा कि प्रदेश में उत्पादित यूरिया में प्रयुक्त होने वाले प्राकृतिक गैस पर लगने वाले विशेष प्रकार के प्रवेश कर (एसीटीएन) की वजह से राज्य में पड़ोसी राज्यों की तुलना में यूरिया के दाम सौ रुपये प्रति बोरा अधिक होने के कारण बिहार, उत्तराखंड तथा हरियाणा राज्यों से तस्करी कर सस्ती यूरिया खरीदने से राज्य को राजस्व की हानि हो रही है?
सदस्य ने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार एसीटीएन को समाप्त कर राज्य में उत्पादित यूरिया के बिक्री को प्रोत्साहित करेगी? जवाब में विभागीय मंत्री ने कहा कि प्रदेश में उत्पादित यूरिया में प्रयुक्त होने वाली प्राकृतिक गैस पर वैट अधिनियम के अंतर्गत लगने वाले अतिरिक्त कर का अनुदान के रूप में भारत सरकार द्वारा मान्यता न होने के कारण यूरिया के प्रति बैग की बिक्री पर 47 रुपये एसीटीएन उनके द्वारा वसूला जाता है, जो एमआरपी के अतिरिक्त होता है।
मंत्री ने सीमावर्ती राज्यों से यूरिया की तस्करी एवं राजस्व हानि की संभावना को क्षीण बताया। साथ ही कहा कि प्राकृतिक गैस का प्रयोग यूरिया के अतिरिक्त अन्य औद्योगिक इकाइयों के द्वारा भी किया जाता है तथा प्राकृतिक गैस पर अतिरिक्त कर समाप्त करने से राज्य के राजस्व में काफी हानि होगी।
मंत्री ने कहा कि यूरिया की कीमत प्रति बोरी 100 रुपये ज्यादा होने की बात गलत है।
नेता विरोधी दल स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार ने यूरिया को अन्य राज्यों की तुलना में महंगी बिकने की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि यदि अन्य राज्यों में गैस करमुक्त भी है तो यूपी में क्यों नहीं हो सकती।
विभागीय मंत्री ने कहा कि चूंकि भारत सरकार का किसानों से कोई नाता नहीं है, इसलिए एसीटीएन लगाने में पक्षपात किया गया है। गुजरात पर कृपा की गई है, लेकिन यूपी में नहीं।
उन्होंने बताया कि गुजरात में 15 रुपये तो यूपी में 47 रुपये कर लिया जा रहा है। मौर्य ने कहा कि भारत सरकार का हवाला देकर राज्य अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। नेता विरोधी दल सरकार को किसान विरोधी बताते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।
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