रात नौ बजे एसएसबी जवानों की कार्रवाई के बाद हाथियों का झुंड मौके से खिसका। तब उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। देर रात तक मशाल जलाकर लोग हाका लगाते रहे।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के कतर्नियाघाट रेंज में गेरुआ पार घने जगंलों में हाथी ने भरथापुर निवासी लेखराम को रौंदकर मार डाला था। इस घटना के बाद पुलिस और वनकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन तभी दो दर्जन हाथियों का झुंड जंगल के अंदर से निकल आया। इस पर सभी ने भागकर जान बचाई थी।
रात नौ बजे तक हाथियों का झुंड मृतक लेखराम के आसपास मंडराता रहा। इसके चलते पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई नहीं हो सकी। सभी लोग परेशान थे। तभी सूचना पाकर समाज कल्याण राज्यमंत्री बंशीधर बौद्ध भी रात में नाव से नदी पार पहुंचे। उन्होंने एसएसबी के निरीक्षक मोहर सिंह, राजेंद्र कुमार और सहायक निरीक्षक दर्शन सिंह से वार्ता की।
तीनों एसएसबी अधिकारियों ने 20 जवानों के साथ मशाल जलाकर सर्च लाइट से हाका लगाना शुरू किया। तब रात नौ बजे हाथियों का झुंड जंगल की ओर गया। इसके बाद एसएसबी की ट्रैक्टर ट्रॉली से लेखराम के शव को गांव ले जाया जा सका।
राज्यमंत्री बौद्ध ने रात में लेखराम का शव जंगल से निकलवाने के बाद भरथापुर गांव पहुंचकर मृतक के परिवारीजनों को ढांढस बंधाया और 10 हजार रुपये देकर सांत्वना दी। उन्होंने मुआवजा दिलाने का आश्वासन भी दिया।
राज्यमंत्री ने बताया कि लेखराम बिछिया बाजार में खरीदारी करने के बाद कोटे की दुकान से चीनी व अन्य सामान लेकर घर लौट रहा था। शायद चीनी की खुशबू पाकर हाथी ने हमला किया होगा। लेखराम की मौत के बाद हमलावर हाथी ने उसकी चीनी की पोटली को भी फाड़ डाला था।
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