बदमाशों के पास से पुलिस ने दो किलो गांजा, एक अदद तमंचा व दो जिंदा कारतूस 315 बोर भी बरामद किया। साथ में 5170 रुपये की नगदी के साथ बिना नंबर की दो बाइक भी बरामद हुई है।
पुलिस अधीक्षक सचिंद्र पटेल ने पुलिस टीम को 5000 रुपये के नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया।
गिरफ्तार आरोपी राजेंद्र सिंह कनकपुर मड़ई थाना सुरियावां एवं देवा सिंह मतेथू थाना सुरियावां के निवासी हैं। गिरफ्तार आरोपी राजेंद्र थाना सुरियावां का सक्रिय हिस्ट्रीशीटर है। वह वर्ष 1987 से लगातार अपराध जगत में सक्रिय है। अपराध जगत में इसके कदम क्षेत्रीय डकैती से पड़ी । तभी से लेकर अब तक अपनी शातिर कारनामों को अंजाम दे रहा है।
थाना सुरियावां में इसके विरुद्ध, डकैती, चोरी, नकबजनी, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस, पुलिस मुठभेड़ आदि जैसे 33 महत्वपूर्ण अभियोग पंजीकृत है। शराब एंव मादक द्रव्यों की तस्करी मे 12 बार जेल जा चुका है।
पुलिस की पूछताछ में आरोपी राजेंद्र ने बताया, “हम लोग पैसे के लालच में लुक-छिपकर पुलिस की आंखों से बचकर अबैध शराब की तस्करी व मादक द्रव्यों का व्यवसाय करते हैं। हम लोग धनूपुर थाना हंडिया इलाहाबाद से सस्ते दर पर शराब खरीदते हैं और अपने घर के आसपास लुक-छिपकर व नियत स्थान पर घूम-फिर कर बेचते हैं।”
उसने कहा, “एक शीशी शराब हम लोग 30 रुपये में खरीदते हैं और 50 रुपये में बेचते हैं। हम लोग शराब की शीशी को अपने मोटरसाइकिल के डिग्गी मे रखकर आसानी से ले जाते और बेचते हैं, जिससे पुलिस या आम लोगों को शक नहीं होता है। बिक्री का काम हम लोग ज्यादातर दोपहर से लेकर रात 9 बजे तक करते हैं। शराब तस्करी के समय रास्ते में अगर कोई रुकावट आती है तो अपने पास रखे तमंचे से तुरंत बचाव मे फायर करने की भी तैयारी में रहते हैं।”
दूसरे आरोपी देवा सिंह ने यह बताया, ‘मैं शराब तस्करी के साथ-साथ गांजा भी बेचता हूं। हम लोग अपने मोटरसाइकिल पर कोई नंबर इस लिए नहीं डालते हैं कि कोई हमें पहचान न कर ले। हम दोनों के अलावा तेज सिंहपुर निवासी बिरेंद्र बिंद,अमिलहरा निवासी भोला बिंद व संजय नगर निवासी बहादुर बिंद भी शराब तस्करी में शामिल रहता है।”
पुलिस ने दावा किया कि बरामद शराब छत्तीसगढ़ में बनी हुई है।
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