परीछा की एक-एक कर सभी इकाइयां बंद हो गईं और इसके बाद हाल में शुरू हुए ललितपुर बिजलीघर इकाई भी बंद हो गई। दोनों बिजलीघरों के बंद होने से करीब 1000 मेगावाट का उत्पादन प्रभावित हुआ, हालांकि पांच घंटे बाद बिजलीघर को दोबारा चालू करा दिया गया है, लेकिन पूरा उत्पादन अब अगले दिन ही मिल सकेगा।
जानकारी मिली है कि पारीछा के स्विच यार्ड में तकनीकी खामी आ गई। इसके चलते यहां के आउट गोइंग लाइन ट्रिप कर गई और एक के बाद एक करके सभी चालू इकाइयां ठप हो गईं। पूरा बिजलीघर बंद होने से अभियंताओं में हड़बड़ी मच गई। पारीछा बिजलीघर के बंद होने के समय 600 मेगावाट से ज्यादा का उत्पादन हो रहा है। पारीछा की चपेट में बजाज का ललितपुर स्थित बिजलीघर भी आ गया और यहां की 400 केवी की लाइन भी ट्रिप कर गई और विद्युत उत्पादन बंद हो गया। ललितपुर में तब 400 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था। इस बिजलीघर को अभी चालू नहीं किया जा सका है।
सूत्रों का कहना है कि ललिपुर बिजलीघर को अब 72 घंटे बाद ही चालू हो सकेगा। बजाज के इस बिजलीघर को 20 सितंबर को ही चालू किया गया था। प्रदेश में बिजली की मांग 13000 मेगावाट चल रही है, जबकि इन दोनों बिजलीघरों के बंद हो जाने से बिजली की उपलब्धता 11 हजार मेगावाट तक आ गई है। बाद में पारीछा बिजलीघर चल जाने से पावर कारपोरेशन को कुछ राहत मिली है।
अभी तक अनपरा सी की लैंकों की 600 मेगावाट की एक इकाई बंद चल रही थी। अब बजाज की ललितपुर इकाई बंद हो जाने से प्रदेश में एक बार फिर बिजली संकट गहरा सकता है। उधर, पावर कारपोरेशन के अफसरों का कहना है कि मौसम में नरमी होने से ज्यादा कटौती नहीं करनी पड़ी है।
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