बांदा, 11 जुलाई (आईएएनएस)। केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने भले ही ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया है, लेकिन यह नारा भी धरातल में किसी जुमले से ज्यादा नहीं है। इसके उलट कछुआ गति से ही सही, एक गैर सरकारी महिला संगठन (एनजीओ) ‘वनांगना’ ने बुंदेलखंड के बांदा जिले की 30 किशोरियों को आगे की पढ़ाई के लिए गोद ले लिया है और नौवीं कक्षा में दाखिला कराने की पहल शुरू कर दी है।
उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के वाशिंदे गरीबी और मुफलिसी की जिंदगी गुजार रहे हैं। किसी तरह दो वक्त की रोटी इंतजाम हो जाए, उनके लिए इतना ही काफी है। आर्थिक ढांचा कमजोर होने की वजह से ज्यादातर किशोरियां गांव-देहात में आठवीं कक्षा की पढ़ाई के बाद विद्यालय छोड़ देती हैं। दो दशक से बुंदेलखंड में महिलाओं और बच्चियों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में काम कर रहे गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘वनांगना’ ने अब इन वंचित किशोरियों को बेहतरीन शिक्षा दिलाने के लिए कमर कस ली है।
वनांगना ने अपने पायलट प्रोजेक्ट के तहत फिलहाल नरैनी विकास खंड के पांच गांवों लहुरेटा, पुकारी, शंकर बाजार, जमवारा और गोरेपुरवा की 30 ऐसी किशोरियों को चिन्हित कर उनकी आगे की पढ़ाई का जिम्मा संभाला है, जो आर्थिक ढांचा कमजोर होने या हिंसक हो रहे समाज के डर से आठवीं कक्षा पास करने के बाद विद्यालय छोड़ कर घर बैठ गई थीं।
पायलट प्रोजेक्ट की कार्यक्रम संयोजक, शबीना मुमताज ने बुधवार को आईएएनएस को बताया “संस्था ने हाल ही में स्वावलंबन शिविर का आयोजन कर 30 ऐसी किशोरियों का चयन किया है, जिन्होंने विभिन्न कारणों से आठवीं कक्षा पास करने के बाद पढ़ाई बंद कर दी थी। उन्हें शिक्षा की महत्ता समझा कर आगे की नौवीं कक्षा में दाखिला कराने के लिए राजी कर लिया गया है। उनके अभिावकों को भी विश्वास में लिया गया है।”
उन्होंने बताया, “इन वंचित किशोरियों की पढ़ाई का जिम्मा वनांगना संभालेगी और बेहतरीन तामील हासिल करवा कर उन्हें कुछ बनने के लिए प्रेरित करेंगे। इन किशारियों में ज्यादातर दलित और मुस्लिम समुदाय से हैं, जो आर्थिक तंगी और सामाजिक प्रदूषण के कारण अपनी पढ़ाई बंद कर चुकी हैं।”
चयनित किशोरियों में से अजरा, अर्चना, विमला, रुखसाना और प्रियंका ने अपनी पढ़ाई छोड़ने के अलग-अलग कारण गिनाए हैं और वनांगना के संरक्षण में दोबारा पढ़ाई जारी करने की हामी भरी है।
अजरा का कहना है कि वह पढ़-लिख कर सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहेगी, जबकि प्रियंका ने शिक्षिका बनकर बच्चियों को शिक्षित करने का संकल्प लिया है।
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