गुवाहाटी, 10 जून (आईएएनएस)। म्यांमार में एनएससीएन-खापलांग के अध्यक्ष एस.एस.खापलांग के निधन के एक दिन बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने शनिवार को समूह में शामिल भारतीय नागाओं से समर्पण करने तथा राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की।
यहां एक सरकारी कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान अपील करते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि जो हिंसा त्यागने को तैयार है, सरकार उनके पुनर्वास को तैयार है।
उन्होंने कहा, “एनएससीएन-खापलांग के अध्यक्ष एस.एस.खापलांग म्यांमार का नागा था और म्यांमार में उसका काफी प्रभाव रहा है। एनएससीएन-खापलांग में म्यांमार के साथ-साथ भारत के भी नागा हैं। मैं म्यांमार के नागाओं पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन एनएससीएन-के के भारतीय नागाओं से अपील कर रहा हूं कि वे समर्पण करें और अगर वे हिंसा त्यागने को तैयार हैं, तो भारत सरकार उनके पुनर्वास के लिए तैयार है।”
रिजिजू ने दलील दी कि खापलांग के निधन का प्रभाव अन्य उग्रवादी संगठनों पर भी पड़ेगा, जिन्होंने वर्तमान में म्यांमार में शरण ले रखी है। उन्होंने कहा, “म्यांमार में खापलांग का खासा प्रभाव है और कई संगठन उस पर आश्रित हैं। एनएससीएन को तो नुकसान होगा ही, खापलांग के बिना उन्हें अपने मकसद को हासिल करने में कठिनाई होगी।”
उल्फा के वार्ता समर्थक गुट के साथ जारी शांति वार्ता के बारे में पूछे जाने पर रिजिजू ने कहा कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और लगभग अंतिम चरण तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने कहा, “उल्फा के वार्ता समर्थक गुट की अधिकांश मांगों पर विचार किया जा रहा है और हम उनपर गंभीरता पूर्वक विचार कर रहे हैं।”
रिजिजू ने यह स्पष्ट किया कि ‘संप्रभुता’ पर कोई बातचीत नहीं हो सकती और अगर ‘संप्रभुता’ एजेंडे में है, तो कोई बातचीत नहीं हो सकती।
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