आगरा, 10 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण(एनजीटी) ने आगरा प्रशासन और सरकारी एजेंसियों को यमुना के डूब क्षेत्र में अतिक्रमण से जुड़े गलत विवरण जमा करने पर फटकार लगाई है।
याचिकाकर्ता डी. के. जोशी ने आरोप लगाया कि एक दर्जन से अधिक भवन निर्माताओं ने विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए बगैर अवैध रूप से यमुना के डूब क्षेत्र में बहुमंजिली इमारतें बना दी हैं।
कोई कार्रवाई नहीं करने और आगरा विकास प्राधिकरण एवं संभागीय आयुक्त की उपेक्षा से असंतुष्ट एनजीटी ने अपने पंजीयक को शुक्रवार को इलाके का नया सर्वेक्षण करने का आदेश दिया।
न्यायाधिकरण ने स्थानीय विभागीय प्रमुख एवं पुलिस प्रमुख को मदद करने और इसके लिए जरूरी सहायता मुहैया कराने का निर्देश दिया है।
78 वर्षीय पर्यावरणविद ने आईएएनएस से कहा, “मैं नई बस्ती बसाने वालों के साथ मिली भ्रष्ट नौकरशाही और शक्तिशाली दागी राजनेताओं के खिलाफ अकेले लड़ाई लड़ रहा हूं। वे सभी मेरे खिलाफ जुट गए हैं और नदी से लगी सारी जमीन को निगल जाने की कोशिश कर रहे हैं।”
जोशी ने कह, “मैं असहाय हूं और बहुत दुखी हूं। लेकिन प्रकृति अपना बदला जरूर लेगी।”
एनजीटी ने पंजीयक की भूमिका तय कर दी है और उन्हें जो करना है उस जांच के बिंदुओं को भी बता दिया है।
इसमें वर्ष 2010 में आई बाढ़ के दौरान उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग ने जांच कर जो संकेत दर्ज किया था, उसके हिसाब से नए निर्माण की स्थिति की पहचान की जाएगी। कुछ भवन तो बिल्कुल नदी के तट पर हैं, जबकि अन्य यमुना से 200 और 100 मीटर की दूरी पर हैं।
याचिकाकर्ता के वकील राहुल चौधरी ने आईएएनएस को बताया कि अब किसी के लिए भी अदालत को गुमराह कर पाना असंभव हो गया है। अदालत ने स्थिति पर सख्त रुख अपनाया है।
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