दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। ऑर्गेनाजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया (ओपीपीआइ) ने शुक्रवार को अपने पांचवें हेल्थकेयर एक्सेस समिट का आयोजन किया। इसे स्वास्थ्य एवं पारिवारिक कल्याण मंत्रालय, फार्मास्युटिकल्स विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय का सहयोग प्राप्त रहा।
समिट का विषय एक्ट (एसीटी-(जागरुकता, लक्षता निर्माणएवं उपचार) ऑन नॉन-कम्यूनिकेबल डिजीजेज (एनसीडी) था। इस दौरान पूरी चर्चा एनसीडी के तेजी से बढ़ते जोखिम से निपटने और इस बीमारी के बोझ को मापने पर केन्द्रित थी।
इस सम्मेलन में अनेक सरकारी अधिकारी, नीति निर्माता, स्वास्थ्य सेवा एवं फार्मास्युटिकल उद्योगों के अग्रदूत, वैश्विक हेल्थकेयर विशेषज्ञ और अन्य प्रतिष्ठित पेशेवर उपस्थित हुए। प्रतिभागियों ने एकदिवसीय इस सम्मेलन में एनसीडी चुनौतियों से निपटने व संभावित समाधानों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
एक्सेस समिट में एनसीडी के प्रति इस ध्यानाकर्षण को चार पृष्ठभूमियों पर तैयार किया गया था : चुनौती का दायरा, एनसीडी पर नियंत्रण के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का ग्लोबल ऐक्शन प्लान, सु²ढ़ रोगी केन्द्रित हेल्थकेयर सिस्टम की जरूरत और घोषणा पत्र के रूप में एक खाका।
सम्मेलन के दौरान नोवो नॉरडिस्क के लिए चेंजिंग डायबिटीज ब्रांड एम्बेसेडर क्रिकेट की दुनिया के हीरो सचिन तेंदुलकर ने कहा, “मधुमेह भारत और दुनिया भर में चिंता का कारण है। यह एक विशाल सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। नोवो नॉरडिस्क द्वारा अग्रणी भारत में बदलता मधुमेह आंदोलन रोग के बारे में जागरुकता फैलाने और समय पर दखल करने में महत्वपूर्ण रहा है। यह हमें नियंत्रित करे, इससे पहले आइये हम इस पर काबू करते हैं।”
एनसीडीज 2013-2020 के बचाव व नियंत्रण के लिए डब्लूएचओ के ग्लोबल ऐक्शन प्लान के अनुरूप, भारत पहला देश है, जहां विशिष्ट राष्ट्रीय लक्ष्य और सूचकांक विकसित किये गये हैं। इनका उद्देश्य एनसीडी के कारण समय से पहले हो रही वैश्विक मौतों की संख्या को 2025 तक 25 प्रतिशत तक कम करना है।
डॉ. शैलेश अयंगर (ओपीपीआइ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक) ने कहा, “वास्तव में हमारे देश में हेल्थकेयर से संबंधित कई चुनौतियां हैं। लेकिन हमें गर्व है कि वर्तमान में कई हेल्थकेयर सूचकांक 50 साल पहले की तुलना में काफी बेहतर हैं। हमने जानलेवा लेप्रोसी और पोलिया के खिलाफ लड़ाईयां जीती हैं। हालांकि, एनसीडी एक दुखद सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता के तौर पर उभर रही है। इसमें सभी हितधारकों की संयुक्त ²ढ़ इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता की जरूरत होगी, ताकि एनसीडी की व्यापकता को रोकने के लिए सहयोगपूर्वक काम किया जा सके।”
अपनी सभी गतिविधियों में रोगियों के महत्व को दोहराते हुए, ‘केपीएमजी-ओपीपीआइ रिपोर्ट ऑन हेल्थकेयर एक्सेस इनीशिएटिव्स’ को सम्मेलन में जारी किया गया। रिपोर्ट में भारत में वर्तमान हेल्थकेयर परि²श्य को प्रस्तुत किया गया है और इसमें एक्सेस इनीशिएटिव्स को क्रियान्वित करने में होने वाली और देरी से बीमारी के समर्थ बोझ पर भी जोर डाला गया है। इसमें ओपीपीआइ की सदस्य कंपनियों द्वारा रोगियों की हेल्थकेयर तक पहुंच को सुधारने की दिशा में किये गये विभिन्न हस्तक्षेपों को भी संक्षेप में दिया गया है।
इस सम्मेलन में, ओपीपीआइ ने ओपीपीआइ हेल्थकेयर एक्सेस अवार्ड 2016 से अरविंद आइ केयर सिस्टम्स को भी सम्मानित किया। द कैंसर इंस्टीट्यूट (डब्लूआइए)-अडयार, चेन्नई को ओपीपीआइ हेल्थकेयर एक्सेस अवार्ड ऑन एनसीडी दिया गया और डॉ वी. मोहन (डॉ. मोहन्स डायबिटीज स्पेश्यलिटीज सेंटर) को ओपीपीआइ अवार्ड फॉर इम्प्रूविंग एक्सेस टु डायबिटीज केयर दिया गया।
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