पुणे, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआइआइ) के तीन प्रतिष्ठित छात्रों ने अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को यह निर्णय पिछले कुछ महीनों से देश में व्याप्त उस माहौल के विरोध में लिया है, जिसे उन्होंने असहिष्णुता कहा है।
महाराष्ट्र के विक्रांत पवार, उत्तर प्रदेश के राकेश शुक्ला और गोवा के प्रतीक वत्स वे तीन भूतपूर्व छात्र हैं जो अपने पुरस्कार लौटाएंगे।
यह फैसला एफटीआईआई के छात्रों की उस घोषणा के कुछ दिनों बाद आया कि वे अपनी 139 दिनों की हड़ताल को समाप्त करके अपनी कक्षाओं में लौट जाएंगे, लेकिन वे संस्थान के अध्यक्ष के रूप में गजेंद्र चौहान की नियुक्ति का शांतिपूर्ण विरोध जारी रखेंगे।
पवार को अपनी फिल्म ‘कातल’ के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ लघु फिक्शन वर्ग’ में 2012 में राष्ट्रपति का स्वर्ण पदक मिला था। शुक्ला को अपनी फिल्म ‘डॉन्की फेयर’ के लिए 2013 में ‘राष्ट्रीय फिल्म छात्र महोत्सव’ में ‘विशेष उल्लेख पुरस्कार’ मिला था और वत्स को अपनी फिल्म ‘कल, 15 अगस्त, दुकान बंद रहेगी’ के लिए 2010 में सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म वर्ग में रजत कमल पुरस्कार मिला था।
पवार ने कहा कि अब मुद्दा एफटीआईआई के हाथों से निकल चुका है और देश की समूची शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
इस फैसले के बाद पवार, शुक्ला और वत्स की तिकड़ी भी पिछले कुछ दिनों में देश भर में विभिन्न राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान लौटाने वाले विभिन्न लेखकों, बुद्धिजीवियों, कलाकारों और अन्य लोगों की लंबी फेहरिस्त में शामिल हो गई है।
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