नई दिल्ली, 11 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय से सोमवार को कहा कि एस्सार समूह द्वारा कॉरपोरेट प्रमुखों, कैबिनेट मंत्रियों तथा नौकरशाहों की साल 2001-06 के बीच बातचीत को रिकॉर्ड करने के सर्वोच्च न्यायालय के एक वकील के आरोप की पुलिस प्रारंभिक जांच करेगी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.रोहिणी तथा न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की एक खंडपीठ ने आरोपों की न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच के लिए वकील सुरेन उप्पल की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया।
न्यायालय द्वारा सरकार से मामले पर उठाए गए कदमों के बारे में पूछे जाने पर अतिरिक्त महाधिवक्ता संजय जैन ने कहा, “सरकार ने पुलिस आयुक्त (दिल्ली) से आरोपों की प्रारंभिक जांच के लिए आग्रह करने का फैसला लिया है।”
उप्पल ने दावा किया कि उन्होंने रिकॉर्ड की गई बातचीत की सीडी के आधार पर याचिका दायर की है, जिसकी असलियत के बारे में भी वह जानना चाहते हैं।
उप्पल ने कहा कि उन्हें पता चला था कि एस्सार की तरफ से उसके एक कर्मचारी द्वारा अवैध व गैरकानूनी तरीके से कथित तौर पर फोन टैपिंग की गई है। वह कर्मचारी कंपनी छोड़ चुका है।
उप्पल ने अपनी जनहित याचिका में एस्सार समूह के एक शीर्ष अधिकारी तथा कर्मचारी अलबासित खान को मामले में प्रतिवादी बनाया है। खान एस्सार समूह के पूर्व कर्मचारी हैं। उप्पल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की गई शिकायत में खान पर पांच साल तक वीवीआईपी लोगों की कथित तौर पर टेलीफोन टैपिंग की शिकायत की थी।
एस्सार समूह ने हालांकि आरोपों का खंडन किया है।
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