भुवनेश्वर, 20 अगस्त (आईएएनएस)। ओडिशा सरकार ने शनिवार को अंतर राज्यीय नदी जल प्रबंधन के मुद्दे पर केंद्र से और स्पष्टीकरण मांगा है।
ओडिशा का दावा है कि उसे छत्तीसगढ़ की ‘केलो वृहद सिंचाई परियोजना’ को तकनीकी आर्थिक मंजूरी दिए जाने की सूचना नहीं दी गई।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिवों ने महानदी जल विवाद पर चर्चा करने के लिए 29 जुलाई को नई दिल्ली में एक बैठक में हिस्सा लिया था, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) ने की थी।
ओडिशा राज्य जल संसाधन सचिव पी. के. जेना ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से उनकी सरकार द्वारा उठाए गए बिंदुओं को शामिल करते हुए बैठक के संशोधित मिनट जारी करने का आग्रह किया है।
जेना ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने ऊपरी महानदी बेसिन के उपलब्ध पानी का उपयोग करने के लिए प्रस्तावित मास्टर प्लान के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की थी।
जेना ने मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में कहा, “ऐसा लगता है कि वह मास्टर प्लान जो फिलहाल केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के पास विचाराधीन है, उसमें ऊपरी महानदी बेसिन के उपलब्ध जल के 88 प्रतिशत के प्रयोग का प्रस्ताव है। सरकार के पास इस प्रस्तावित मास्टर प्लान से संबंधित कोई जानकारी नहीं है।”
उन्होंने कहा कि इस जानकारी को न छत्तीसगढ़ और न सीडब्ल्यूसी ने ही साझा किया।
उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूसी ने जब छत्तीसगढ़ की ‘केलो वृहद सिंचाई परियोजना’ को तकनीकी आर्थिक मंजूरी दी थी, तब भी ओडिशा को सूचित नहीं किया गया था।
जल संसाधन सचिव ने कहा, “सीडब्ल्यूसी द्वारा इस तरह की एकतरफा कार्रवाई अंतरराज्यीय नदी जल प्रबंधन की उचित भावना के अनुरूप नहीं है।”
जेना ने कहा, “हमने मंत्रालय से आग्रह किया है कि बैठक के संशोधित मिनट के बिंदुओं को शामिल करके दोनों राज्यों को भेजे जाएं।”
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