तिरुवनंतपुरम, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। ओमान द्वारा घोषित की गई माफी योजना से लगभग 60,000 भारतीयों को लाभ मिल सकता है, जिसके तहत वैध दस्तावेज नहीं होने की स्थिति में लोग बिना किसी जुर्माने के अपने देश लौट सकते हैं या वे अपने दस्तावेजों में सुधार करा सकते हैं। प्रवासी मामलों के विशेषज्ञ ने यह जानकारी दी।
ओमान सरकार ने सोमवार को इस योजना की घोषणा की। यह योजना तीन मई से 30 जुलाई तक रहेगी।
सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टीज के प्रवासी विभाग के प्रमुख एस. इरुदयाराजन ने आईएएनएस को बताया कि ओमान में 400,000 भारतीय हैं, जिनमें से 1.89 केरल के निवासी हैं।
इरुदयाराजन ने कहा, “ओमान में रह रहे 400,000 भारतीयों में से लगभग 15 प्रतिशत के पास कानूनी दस्तावेज नहीं हैं। यह उन लोगों के लिए सही समय है, जिनके पास उचित दस्तावेज नहीं है, वे या तो उनमें सुधार कर सकते हैं या वापस घर लौट सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि सूत्रों के मुताबिक, इसी तरह की एक योजना बहरीन में भी घोषित हुई थी।
इरुदयाराजन ने कहा, “हमने प्रशासन से कई अनुग्रह किए कि मध्य पूर्व देशों में रोजगार करने का फैसला कर चुके भारतीयों को पूर्व प्रस्थान प्रशिक्षण देना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं है, वे श्रमिक हैं, जो काम करने के लिए कामगार वीजा हासिल करने के लिए लगभग एक लाख रुपये तक का भुगतान करते हैं।
इरुदयाराजन के मुताबिक, “कई बार कुछ लोग दुर्भाग्यशाली होते हैं कि उन्हें रोजगार और तय किया गया वेतन नहीं मिलता। इसके बाद उनकी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। सामान्य रूप से दो या तीन सालों की अवधि के बाद अनुबंध सीमा की समाप्ति के बाद वे गैरकानूनी रूप से वहां काम करते हैं।”
के.सी. जकारिया और इरुदयाराजन द्वारा हाल ही में किए गए अध्ययन से पता चला है कि 2014 में यहां केरल के प्रवासियों की संख्या 23.63 लाख थी, जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत केरल के प्रवासी लोग विभिन्न मध्य पूर्व देशों में रह रहे थे।
केरल के प्रवासी मामलों के मंत्री के.सी.जोसेफ ने आईएएनएस को बताया कि उन्होंने माफी योजना के बारे में सुना है और वे भारत लौटने के इच्छुक व्यक्तियों की मदद के लिए केरल के कई संगठनों के संपर्क में हैं।
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