ओलम्पियाड के लिए रणनीति तैयार करने में उलझी भारतीय टीम

चेन्नई, 27 अगस्त (आईएएनएस)। अजरबेजान की राजधानी बाकू की मेजबानी में शतरंज ओलम्पियाड शुरू होने में एक सप्ताह से भी कम समय रह गया है, लेकिन भारतीय दल ओलम्पियाड के लिए बोर्ड ऑर्डर रणनीति तैयार करने में ही उलझी हुई है।

चेन्नई, 27 अगस्त (आईएएनएस)। अजरबेजान की राजधानी बाकू की मेजबानी में शतरंज ओलम्पियाड शुरू होने में एक सप्ताह से भी कम समय रह गया है, लेकिन भारतीय दल ओलम्पियाड के लिए बोर्ड ऑर्डर रणनीति तैयार करने में ही उलझी हुई है।

बाकू में दो सितंबर से शुरू हो रहे विश्व शतरंज ओलम्पियाड में हिस्सा लेने वाली भारतीय दल के कप्तान ग्रैंड मास्टर आर. बी. रमेश ने आईएएनएस से कहा, “अभी इस पर विचार-विमर्श चल रहा है। हम 2014 के ओलम्पियाड में अपनाई गई रणनीति ही अपनाएंगे या कोई रणनीति अपनाई जाएगी, इस संबंध में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। ओलम्पियाड शुरू से एक दिन पहले आयोजकों को इस संबंध में सूचित कर दिया जाएगा।”

उल्लेखनीय है कि आर. बी. रमेश भारतीय दल के गैर प्रतिस्पर्धी कप्तान हैं और ओलम्पियाड एक टीम स्पर्धा है जिसमें हिस्सा लेने वाली प्रत्येक टीम में चार खिलाड़ी शामिल होते हैं। हर टीम को स्पर्धा से पहले आयोजकों को अपना बोर्ड प्लान बताना होता है, जिसमें बाद में बदलाव नहीं किया जा सकता। किसी टीम की रणनीति में यह बोर्ड प्लान काफी अहम माना जाता है।

रमेश ने खिलाड़ियों की ईएलओ रैंकिंग के आधार पर उन्हें बोर्ड दिए जाने के सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन बाकू शतरंज ओलम्पियाड में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम को देखें तो उनका बोर्ड उनकी रैंकिंग के हिसाब से ही होने की उम्मीद है।

हालांकि यह टीम की 2014 की रणनीति से अलग होगी। भारतीय टीम नॉर्वे शतरंज ओलम्पियाड-2014 में कांस्य पदक विजेता रही थी जो ओलम्पियाड में भारत का पहला पदक भी था।

तब भारत ने विपक्षी टीम के कमतर खिलाड़ियों के खिलाफ अपने सबसे मजबूत खिलाड़ियों को उतारा था, जबकि शीर्ष-2 बोर्ड के लिए स्थायी प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उतारा था। यह रणनीति लोवर बोर्ड पर जीत सुनिश्चित करने की गरज से अपनाई गई थी, जबकि कमतर रैंक वाले खिलाड़ियों का लक्ष्य विपक्षी टीम के मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ ड्रॉ खेलना था।

लेकिन भारतीय टीम अपनी इस रणनीति में बदलाव कर सकती है, क्योंकि एशियन नेशंस कप में भारतीय खिलाड़ियों द्वारा कांस्य और स्वर्ण पदक जीतने के बाद इस बार शतरंज जगत भारत को खिताब का मजबूत दावेदार मान रहा है।

एक शतरंज कोच ने नाम न छापने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, “भारतीय टीम के खिलाड़ियों को फुटबाल में शीर्ष खिलाड़ियों की तरह देखा जाएगा। इसका मतलब है कि प्रतिस्पर्धी टीमें इस बार भारत को हल्के में नहीं लेंगी और भारत के खिलाफ अपनी सबसे मजबूत टीम उतारेंगी।”

कोच के अनुसार, 2014 की अपेक्षा भारत के लिए इस बार परिस्थिति बदली हुई है। तब भारत को 19वीं वरीयता मिली थी और भारतीय खिलाड़ियों का औसत ईएलओ रेटिंग 2,617 था। लेकिन इस बार भारत को 11वीं वरीयता दी गई है तथा भारतीय खिलाड़ियों की औसत रेटिंग 2,651 है।

वहीं रमेशा का कहना है, “वास्तव में टीम का प्रदर्शन सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि किसी दिन विशेष पर कैसा प्रदर्शन करते हैं।”

उल्लेखनीय है कि 16वीं विश्व वरीयता प्राप्त ग्रैंड मास्टर पी. हरिकृष्ण (2,752) भी इस बार भारतीय टीम का हिस्सा हैं। हरिकृष्ण अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में व्यस्तता के चलते नॉर्वे शतरंज ओलम्पियाड-2014 में हिस्सा नहीं ले सके थे।

भारतीय टीम के अन्य सदस्यों में ग्रैंड मास्टर विदित संतोष गुजराती (2,669), ग्रैंड मास्टर बी. अधिबान (2,671), एस. पी. सेतुरमन (2,649) और राष्ट्रीय चैम्पियन कार्तिकेयन मुरली (2,514) शामिल हैं।

अखिल भारतीय शतरंज महासंघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भरत सिंह चौहान ने आईएएनएस से कहा, “मौजूदा भारतीय टीम बेहद मजबूत है। इस बार भी हम पदक ला सकते हैं।”

13 सितंबर तक 11 चरणों में चलने वाले बाकू ओलम्पियाड-2016 में 176 देशों की कुल 182 टीमें हिस्सा लेंगी।

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