काठमांडू, 12 जुलाई (आईएएनएस)। सीपीएन(यूएमएल) नीत सरकार से सीपीएन (माओवादी सेंटर) के समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के अगले कदम पर यहां राजनीति प्र्यवेक्षकों की पैनी नजर है।
काठमांडू, 12 जुलाई (आईएएनएस)। सीपीएन(यूएमएल) नीत सरकार से सीपीएन (माओवादी सेंटर) के समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के अगले कदम पर यहां राजनीति प्र्यवेक्षकों की पैनी नजर है।
अब कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वह इस्तीफा देंगे या अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेंगे या खुद विश्वास मत की मांग करेंगे, क्योंकि सत्ताधारी दल ने अभी तक ऐसा कुछ स्पष्ट नहीं किया है।
सीपीएन(माओवादी सेंटर) द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद अगले कदम पर चर्चा के लिए नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिन वादी) के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री ओली ने दिन में पार्टी की स्थाई समिति की एक बैठक बुलाई।
नेपाली कांग्रेस नीत सरकार के गठन की संभावना क्षीण है, क्योंकि उसने नई सरकार के गठन का समर्थन करने के लिए सीपीएन(माओवादी सेंटर) को लिखित समर्थन देने का आश्वासन दिया है।
इस बीच ओली ने इस्तीफा देने की जगह संसद में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने की तैयारी शुरू कर दी है।
एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी के प्रमुख सचेतक भानु भक्त धकाल ने कहा कि पार्टी संसदीय नियमों का अनुपालन करेगी। उन्होंने कहा, “इस सरकार ने कुछ अच्छे काम किए हैं। इन अच्छे कामों के कारण समर्थन वापस लिया गया है। इस मुद्दे पर हम संसद का सामना करेंगे।”
सरकार की अगली कार्रवाई की दिशा तय करने के लिए प्रधानमंत्री ओली ने भी अपने सहयोगियों से चर्चा शुरू कर दी है।
कानून के जानकारों के अनुसार, नेपाली कांग्रेस या माओवादियों को सरकार के खिलाफ या तो अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहिए या प्रधानमंत्री खुद विश्वास मत हासिल करने की इच्छा जाहिर करते हुए एक प्रस्ताव की मांग कर सकते हैं।
ओली सरकार में उप प्रधानमंत्री समेत माओवादियों के आठ मंत्री हैं। माओवादी सेंटर ने ओली सरकार पर नौ सूत्री समझौता लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। यह समझौता माओवादी सेंटर और एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी पार्टी के बीच हुआ था।
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