..और रजनी के घर नहीं गूंज पाई शहनाई

पटना, 21 नवंबर (आईएएनएस)। जिस घर में बुधवार को शहनाई गूंजनी थी, वहां आज मातम है। सभी रो रहे हैं, एक-दूसरे को दिलासा भी दे रहे हैं। पटना के बोरिंग रोड निवासी प्रमोद सिंह की भतीजी रजनी के हाथों में दो दिन बाद मेहंदी लगनी थी, और उसी रजनी का आज रो-रोकर बुरा हाल है।

पटना, 21 नवंबर (आईएएनएस)। जिस घर में बुधवार को शहनाई गूंजनी थी, वहां आज मातम है। सभी रो रहे हैं, एक-दूसरे को दिलासा भी दे रहे हैं। पटना के बोरिंग रोड निवासी प्रमोद सिंह की भतीजी रजनी के हाथों में दो दिन बाद मेहंदी लगनी थी, और उसी रजनी का आज रो-रोकर बुरा हाल है।

इंदौर में नौकरी कर रहे सुबोध सिंह अपनी पत्नी और दो छोटी बेटियों के साथ भतीजी की शादी में शामिल होने इंदौर-पटना एक्सप्रेस से पटना आ रहे थे, लेकिन दुर्घटना में सुबोध सिंह की पत्नी और दोनों बेटियों की जान चली गई।

बेटी की शादी की तैयारी में जुटीं मंजू भी अपनी देवरानी और बच्चों की मौत की खबर सुनकर गमजदा हैं। सुबोध की भाभी मंजू कहती हैं कि घर में खुशी का माहौल था और रविवार को हमलोग घर में बैठकर चाय पी रहे थे, तभी हादसे की खबर आई।

वह कहती हैं, “सोमवार को रजनी का तिलक था और 23 को शादी। मेहमानों के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। होटल बुक हो चुका था, गाजे-बाजे वाले पहुंचने लगे थे, लेकिन सबकुछ जहां का तहां रह गया।”

दो दिन बाद सुर्ख जोड़े में दुल्हन बनने वाली रजनी इस खबर के बाद से बदहवास है। उसे इस बात का अफसोस है कि उसी की शादी में आते समय यह हादसा हुआ।

रजनी के भाइयों का भी बुरा हाल है। इनका कहना है कि भगवान ने बहुत बुरा किया। एक बहन के हाथ पीले होने थे और दो बहनों को भगवान उठा ले गए।

उत्तर प्रदेश के कानपुर के पास पुखरायां में रविवार को हुई रेल दुर्घटना में 141 से लोग मारे गए हैं और 200 अन्य घायल हैं।

इस हादसे ने बिहार के कई परिवारों को उजाड़ दिया है, तो कई को अपनों से दूर कर दिया है। कई के सपने टूट गए, तो कई की खुशियां गम में बदल गईं।

बिहार के समस्तीपुर जिले के मंगलापुर गांव का रहने वाला नाजिर अहमद तीन साल पूर्व अपनी बेटी के हाथ पीले करने का ख्वाब लेकर इंदौर कमाने गया था। उसका सपना था कि कुछ कमाकर गांव लौटेगा और बेटी की शादी करेगा, परंतु कानपुर रेल हादसे में अपने सपने को सीने में दबाए नाजिर दुनिया से चल बसा। नाजिर इंदौर में कपड़ा कटिंग का काम करता था।

कानपुर रेल हादसे में मंगलापुर का एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। नाजिर की पत्नी सजीदा खातून इस खबर के बाद से ही बेहोश है। बच्चे दहाड़ मार-मारकर रो रहे हैं।

पैसों का जुगाड़ कर उसका भाई वसीम अहमद शव लेने कानपुर रवाना हो चुका है। नाजिर के एक अन्य भाई नसीर अहमद ने आईएएनएस से कहा, “बेटी बड़ी हो रही थी। भाईजान ने सोचा था कि इंदौर से अच्छी कमाई कर आउंगा, तो सजीदा के लिए अच्छा घर खोज उसकी शादी कर दूंगा, लेकिन अल्लाह को यह मंजूर नहीं था।”

नसीर को अफसोस है कि न उसके घर में शहनाई गूंजी और न ही भाईजान का सपना पूरा हो पाया।

इसी तरह बक्सर जिले के डुमरांव निवासी कोमल भी अब इस दुनिया में नहीं है। कोमल इंदौर के एक डेंटल कॉलेज की छात्रा थी और भोजपुर की रहने वाली अपनी मौसेरी बहन की शादी में शामिल होने रविवार को इंदौर-पटना एक्सप्रेस से पटना आ रही थी।

उल्लेखनीय है कि इस हादसे में बिहार के करीब 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग अभी घायल हैं।

इस बीच, इंदौर-पटना एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बिहार के करीब 200 यात्रियों को लेकर विशेष रेलगाड़ी सोमवार सुबह पटना जंक्शन पहुंची है।

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