कण-कण में सोया शहीद, पत्थर-पत्थर है इतिहास

गणतंत्र का अर्थ है, जनता के लिए जनता द्वारा शासन। 26 जनवरी 1950 को हमारा देश गणतांत्रिक देश के रूप में सामने आया। इसी दिन भारत का संविधान भी लागू किया गया। भारत का संविधान लिखित एवं सबसे बड़ा संविधान है। संविधान का निर्माण भारतरत्न डॉ. भीम राव अंबेडकर की अध्यक्षता में 2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन में पूरा हुआ था।

गणतंत्र का अर्थ है, जनता के लिए जनता द्वारा शासन। 26 जनवरी 1950 को हमारा देश गणतांत्रिक देश के रूप में सामने आया। इसी दिन भारत का संविधान भी लागू किया गया। भारत का संविधान लिखित एवं सबसे बड़ा संविधान है। संविधान का निर्माण भारतरत्न डॉ. भीम राव अंबेडकर की अध्यक्षता में 2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन में पूरा हुआ था।

संविधान लागू होने से पहले भी 26 जनवरी का बहुत ही महत्व था, क्योंकि 1929 को राष्ट्र को स्वतंत्र बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पं. जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ था। इसमें यह घोषणा हुई थी कि अगर 26 जनवरी 1930 तक अंग्रेज सरकार भारत को उपनिवेश का पद नहीं प्रदान करेगी तो भारत अपने को पूर्ण स्वतंत्र कर देगा और ऐसा ही हुआ अंग्रेज सरकार ने जब कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की।

इसके बाद सक्रिय आंदोलन आरंभ हो गया। तब से प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। भारत माता के वीर सपूतों ने अपने मातृभूमि के सम्मान एवं आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। ऐसे महान देशभक्तों के त्याग और बलिदान के कारण ही हमारा देश, गणतांत्रिक देश हो सका।

हमारे देश में कदम-कदम पर शौर्य का इतिहास अंकित है। किसी ने सच ही कहा है- ‘कण-कण में सोया शहीद, पत्थर-पत्थर इतिहास है।’ ऐसे ही अनेक देशभक्तों की शहादत का परिणाम है, हमारा गणतांत्रिक देश भारत।

व्यापार के इरादे से भारत आए अंग्रेजों ने धीरे-धीरे अपनी कूटनीति चालों से यहां के राजाओं व सामंतों पर अपना अधिकार कर लिया। आजादी की पहली अलख मंगल पांडेय ने 1957 में जगाई थी। लेकिन संचार संसाधनों की कमी के कारण यह आग ज्वाला न बन सकी, लेकिन इस चिंगारी की आग कभी बुझी ही नहीं।

रानी लक्ष्मीबाई से लेकर सरदार वल्लभ भाई पटेल, लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों के अंदर यह चिंगारी धधकती रही। जनरल डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज द्वारा निहत्थे, बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मारा गया था।

यह वही घटना है, जिसने भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों को जन्म दिया था। उन सभी देशभक्तों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही भारतवर्ष के कोने-कोने में 26 जनवरी राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र के रूप मनाया जाता है। भारत के अलावा यह पर्व विदेशों के भारतीय राजदूतावासों में भी बड़े ही गर्व के साथ मनाया जाता है।

गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह भारत राजधानी दिल्ली में भव्यता के साथ मनाता है। कार्यक्रम के शुभारंभ से पहले प्रधानमंत्री ‘अमर जवान ज्योति’ पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति अपने अंगरक्षकों के साथ इंडिया गेट पर आते हैं, जहां प्रधानमंत्री उनका स्वागत करते हैं। इसके बाद राष्ट्रीय धुन के साथ ध्वजारोहण होता है तथा हवाई जहाजों द्वारा पुष्पवर्षा की जाती है। आकाश में तिरंगे गुब्बारे और सफेद कबूतर छोड़े जाते हैं तथा सैन्य जवानों द्वारा परेड किया जाता है।

परेड विजय चौक से प्रारंभ होकर राजपथ होते हुए लाल किले पर जाकर समाप्त हो जाती है। देश के जवान विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों, मिसाइलों, टैंकों, वायुयानों आदि का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति को सलामी देते हैं एवं अपनी आधुनिक सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हुए हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि वे हमारी सुरक्षा में सक्षम हैं।

विभिन्न राज्यों की झांकियां वहां के सांस्कृतिक जीवन, वेषभूषा, रीति-रिवाजों, औद्योगिक तथा सामाजिक क्षेत्र में आये परिवर्तनों का चित्र प्रस्तुत करती हैं। यह भव्य ²श्य देखकर राष्ट्र के प्रति भक्ति एवं हृदय में उत्साह का संचार होता है। जिन्होंने भारत देश को गणतांत्रिक बनाने में अपना सब कुछ बलिदान कर दिया, उन सभी अमर शहीदों को आइए नमन करें। (आईएएनएस/आईपीएन)

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