नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में विपक्षी विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की। उमर ने इस मुलाकात के बाद कहा कि हिंसाग्रस्त राज्य राजनीतिक समस्या से जूझ रहा है, जिससे प्रशासनिक तरीके से नहीं निपटा जा सकता।
उमर ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कहा, “जम्मू एवं कश्मीर की समस्या उसकी राजनीति से उपजी है। इससे प्रशासनिक तरीके से नहीं निपटा जा सकता और न ही बल प्रयोग से निपटा जा सकता है। इसे मानवीय संकट पैदा करके नहीं संभाला जा सकता।”
नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के नेता ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वह अपने पद का इस्तेमाल कर केंद्र सरकार को यह बताएं कि “आज जो हो रहा है उसका मूल कारण जम्मू एवं कश्मीर की राजनीति है और इसका समाधान भी राजनीतिक रूप से ही निकाला जाना चाहिए, प्रशासनिक तरीके से नहीं।”
उमर ने घाटी में जारी हिंसा की स्थिति से निपटने के लिए राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पीपुल्स डेमोकेट्रिक पार्टी (पीडीपी) के गठबंधन की भी आलोचना की।
नेकां नेता ने कहा, “पिछले कुछ दिनों से हमने देखा है कि लोगों को और अधिक कष्ट पहुंचाकर जम्मू एवं कश्मीर में जारी आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।”
आठ जुलाई को बुरहान वानी के मारे जाने के बाद ‘हमारी अपनी गलतियों के कारण’ स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई है।
इससे पहले, जम्मू एवं कश्मीर के एक प्रतिनिधिमंडल ने उमर के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें घाटी की स्थिति से अवगत कराया, जहां पिछले 43 दिनों से कर्फ्यू जारी है।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा।
उमर ने कहा, “पाकिस्तान पिछले 25 सालों से घाटी में शांति भंग करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अगर आप मुझसे पूछें कि वानी के मारे जाने के बाद उत्पन्न हुई स्थिति क्या पाकिस्तान के कारण है, तो मैं कहूंगा ‘नहीं’।”
उमर ने कहा पाकिस्तान ने निश्चित तौर पर स्थिति को भड़काने की कोशिश की है और कुछ हद तक वह उसमें सफल भी हुआ है।
उमर ने कहा, “लेकिन तात्कालिक तनाव का कारण हमारी अपनी गलतियां हैं।”
उमर ने कहा कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि जो पहल सरकार को करनी चाहिए थी, वह विपक्ष कर रहा है।
उन्होंने कहा, “चाहे केंद्र के स्तर पर हो, संसद में कोई भी चर्चा विपक्ष ने ही शुरू की है। इसी प्रकार अगर राज्य सरकार ने कोई भी कदम उठाया है, जो वह केवल विपक्ष के दबाव में ही उठाया है न कि सरकार की पहल के रूप में।”
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