कश्मीर घाटी में केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल को भाव दिए जाने के आसार नहीं

श्रीनगर, 3 सितंबर (आईएएनएस)। आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से सुलग रहे कश्मीर में सांत्वना व समाधान की आस लेकर जा रहे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को घाटी में कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। उनका घाटी में गर्मजोशी से स्वागत के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।

श्रीनगर, 3 सितंबर (आईएएनएस)। आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से सुलग रहे कश्मीर में सांत्वना व समाधान की आस लेकर जा रहे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को घाटी में कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। उनका घाटी में गर्मजोशी से स्वागत के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।

केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल को कुछ ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए भी तैयार रहना होगा, जब उसके सदस्य कश्मीर की अवाम से मिलने के लिए प्रोटोकॉल व सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन कर बैठेंगे।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्य दो दिवसीय दौरे के दौरान अगर सुरक्षित चारदीवारी में बंद रहने का विकल्प चुनते हैं, तो वे समस्या के समाधान से दूर केवल कश्मीर की वादियों की खूबसूरती का दीदार करने तक ही सीमित रह जाएंगे।

संसद के कुछ मंजे हुए सदस्यों को प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनाया गया है। यह प्रतिनिधिमंडल रविवार को यहां आ रहा है, जो घाटी को संकट से उबारने के तरीकों के बारे में विभिन्न संगठनों से चर्चा करेगा।

प्रतिनिधिमंडल में राजनाथ सिंह के अलावा केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली, केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह शामिल हैं।

अन्य सदस्यों में गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे व अंबिका सोनी (सभी कांग्रेस), सीताराम येचुरी (मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी), डी.राजा (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी), असदुद्दीन ओवैसी (ऑल इंडिया मजलिए-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन), शरद यादव (जद-यू), तारीक अनवर (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) तथा सौगत रॉय (तृणमूल कांग्रेस) शामिल हैं।

गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने नई दिल्ली में शनिवार को घाटी के समूचे हालात से प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को अवगत कराया।

उधर, अलगाववादियों ने नागरिक समाज के सदस्यों, व्यापार व यात्रा संगठनों तथा समाज के अन्य वर्गो सहित कश्मीरियों को प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात न करने को कहा है।

कट्टरपंथी धड़े के वरिष्ठ अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के बोल हैं, “वे लोग खून से लथपथ घाटी में सैर-सपाटे के लिए आ रहे हैं।”

कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई) तथा कश्मीर इकोनॉमिक अलायंस (केईए) सहित कई व्यापार संगठनों ने कहा है कि प्रतिनिधिमंडल जब तक पहले अलगाववादियों से नहीं मिलता, वे प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में मुख्यधारा के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले महीने नई दिल्ली राष्ट्रीय पार्टी के नेताओं से मुलाकात की थी।

प्रेक्षकों ने कहा है कि आशा है कि राज्य की मुख्यधारा की पार्टियों के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक के बाद समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा।

कश्मीर में शांति बहाल करने में जम्मू, लद्दाख व घाटी सहित सभी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की भूमिका है।

युवाओं को हिंसा के लिए उकसाने वाले या पथराव में हिस्सा लेने वाले तथा विरोध-प्रदर्शन करने वाले लोगों की संख्या बहस का विषय है, लेकिन तथ्य तो यही है कि लोग बीते 57 दिनों से सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस व सुरक्षाबलों के बीच झड़पों में अब तक 73 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 11 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं, जो साबित करता है कि हालात किस कदर बिगड़ चुके हैं।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्य जब तक कश्मीर की आम आवाम से मुलाकात नहीं करेंगे, तब तक उन्हें सही हालात का पता नहीं चल पाएगा।

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