कश्मीर दोबारा आने का वादा कर रुखसत हुए पर्यटक

श्रीनगर, 16 जुलाई (आईएएनएस)। कश्मीर घाटी में जारी हिंसा का असर अब यहां के लोगों के जीविकोपार्जन पर दिखना शुरू हो गया है। कमाई के लिए सबसे मुफीद माने जाने वाले इस मौसम में हिंसा ने न सिर्फ पर्यटकों को दूर कर दिया, बल्कि पर्यटकों के सहारे जीविका चलाने वालों की हालत दयनीय कर दी है। हालात चाहे जो हों, हिंसा में फंसने के बाद भी पर्यटक धरती के इस स्वर्ग में फिर आने का वादा करके गए हैं।

श्रीनगर, 16 जुलाई (आईएएनएस)। कश्मीर घाटी में जारी हिंसा का असर अब यहां के लोगों के जीविकोपार्जन पर दिखना शुरू हो गया है। कमाई के लिए सबसे मुफीद माने जाने वाले इस मौसम में हिंसा ने न सिर्फ पर्यटकों को दूर कर दिया, बल्कि पर्यटकों के सहारे जीविका चलाने वालों की हालत दयनीय कर दी है। हालात चाहे जो हों, हिंसा में फंसने के बाद भी पर्यटक धरती के इस स्वर्ग में फिर आने का वादा करके गए हैं।

आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद भड़के हिंसक प्रदर्शनों के कारण घाटी में अशांति के नौवें दिन शनिवार को व्यस्त रहने वाले बाजार व डल झील वीरान रहे।

झील के किनारे शिकारा खड़े मिले। इस समय कभी भरे रहने वाले होटलों में कोई अतिथि नहीं है। इस मौसम में सर्वाधिक पर्यटक आते हैं।

अशांति के शुरुआत के समय होटलों में ठहरे लोग बिना भ्रमण किए वापस लौट चुके हैं।

जम्मू एवं कश्मीर पर्यटन विभाग के निदेशक महमूद शाह ने कहा, “अधिकांश पर्यटक वापस लौट चुके हैं।”

शाह ने आईएएनएस से कहा, “होटल खाली हो चुके हैं। 90 फीसदी से अधिक पर्यटक लौट चुके हैं। आमदनी देने वाले पर्यटक अब यहां नहीं है। हमने उनके लौटने की व्यवस्था कर दी, जो यहां फंसे हुए थे।”

श्रीनगर में अधिकांश इलाकों में कर्फ्यू लगा है और पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

एक होटल मालिक सरमद खान ने कहा, “कारोबार का यह सबसे मुफीद समय है। अब कमाई की हमें कोई उम्मीद नहीं है। हम अगस्त तक कम से कम 30-35 बुकिंग रद्द कर चुके हैं।”

उन्होंने कहा, “कई लोगों को तो बिना भ्रमण किए ही यहां से लौटना पड़ा। यह पर्यटन उद्योग को बड़ा नुकसान है।”

वानी की मौत के बाद जैसे ही हिंसा भड़कनी शुरू हुई, पर्यटक विमान पकड़ने के लिए शेख-अल-आलम अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे की ओर रुख करते हुए देखे गए।

कुछ पर्यटक हालांकि अभी भी डल झील के आसपास के पार्को में घूमते देखे जा सकते हैं।

एक पर्यटक ने आईएएनएस से कहा, “हम यहां चार दिनों से फंसे हैं। हम मंगलवार को श्रीनगर आए थे, क्योंकि हमारी बुकिंग थी। हमने जोखिम लिया और आ गए।”

एक अन्य पर्यटक ने कहा, “हमने कुछ नहीं, बस केवल कर्फ्यू और हिंसा देखी। यही कारण है कि हम जा रहे हैं।”

एक दुकानदार मोहम्मद अशरफ ने कहा कि अनुकूल मौसम के कारण जुलाई से सितंबर का महीना कश्मीर घाटी में घूमने के लिए बेहतरीन होता है।

अशरफ ने कहा, “यह बेहद दुख की बात है कि बीते छह दिनों के दौरान हमने कई लोगों को खो दिया। जब हमारे बच्चे मर रहे हों, तो हम दुकानें कैसे खोल सकते हैं?”

आश्चर्य करने वाली बात यह है कि पर्यटक अपने साथ केवल बुरी यादें (कर्फ्यू, बंद और हिंसा) ही नहीं ले जा रहे हैं।

कोलकाता के अरुण चटर्जी ने आईएएनएस से कहा, “इन छह दिनों के दौरान सबसे अच्छी बात यहां के स्थानीय लोगों द्वारा हमारे साथ किया गया अच्छा व्यवहार रहा है।”

उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार सहित स्थानीय लोगों के साथ एक हाउसबोट पर था। उन्होंने हमारे साथ बेहद अच्छा व सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया और मुझे लगता है कि हमारी यात्रा सफल रही।”

चटर्जी ने कहा, “हम यहां हमेशा आना चाहेंगे और कश्मीरियत के अलावा, यहां की सुंदरता का लुत्फ उठाना चाहते हैं। हम यहां शांति की कामना करते हैं।”

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