तिरुवनंतपुरम, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ की तीसरी सबसे बड़ी सहयोगी केरल कांग्रेस (मणि) गठबंधन से नौ महीने बाद बाहर चली गई। कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को कहा कि उसकी इच्छा है कि उसकी गठबंधन सहयोगी वापस आ जाए।
अगस्त 2016 में केरल कांग्रेस (मणि) ने अपने प्रमुख के.एम. मणि के नेतृत्व में कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) से अलग होने का फैसला किया।
तभी से 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में पार्टी के छह विधायक अलग गुट के तौर पर बैठ रहे हैं।
राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष एम.एम. हसन ने मंगलवार को मणि गुट की वापसी की इच्छा जाहिर की।
हसन ने संवाददाताओं से कहा, “यूडीएफ की शुक्रवार की बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी। मणि ने खुद ही यूडीएफ छोड़ दिया था और यूडीएफ का हर सहयोगी वास्तव में मणि की वापसी चाहता है। एक बार यूडीएफ की बैठक के बाद असली तस्वीर खुल कर सामने आएगी।”
मणि उस समय राज्य के वित्तमंत्री थे, तब कांग्रेस पार्टी के एक वर्ग ने उनसे 2015 में ओमन चांडी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की मांग की थी।
इसके बाद ये आरोप लगाए गए कि मणि ने बंद बार को खोलने के लिए रिश्वत ली है।
केरल उच्च न्यायालय द्वारा उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणी के बाद पूर्व वित्तमंत्री का मंत्रिमंडल में बने रहना मुश्किल हो गया और अंतत: उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
हालांकि, वह यूडीएफ में बने रहे और मई 2016 में विधानसभा चुनाव उन्होंने गठबंधन के तहत लड़ा था। मणि ने अगस्त 2016 में यूडीएफ से 34 साल पुराना संबंध तोड़ने का फैसला किया और वह यूडीएफ से अलग हो गए।
यूडीएफ के दूसरे सबसे बड़े सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के महासचिव के.पी.ए. मजीद ने संवाददाताओं से कहा कि सभी जानते हैं कि मणि ने ही यूडीएफ से जाने का फैसला किया था।
मणि के लंबे समय तक पूर्व सहयोगी रहे आर. बालकृष्णन पिल्लई ने कहा कि मणि के पास यूडीएफ में लौटने के सिवाय कोई अन्य विकल्प नहीं है। हालांकि पिल्लई से मणि के संबंध अच्छे नहीं थे।
पिल्लई ने कहा, “यूडीएफ छोड़ने के बाद मणि ने भाजपा की अगुवाई वाले राजग से अपने बेटे (कोट्टायम से लोकसभा सांसद जोस के. मणि) के लिए मोदी सरकार में मंत्री पद के लिए संपर्क किया था। लेकिन ऐसा नहीं होता देख उनके पास यूडीएफ में लौटने के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं है।”
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