नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कानपुर में गंगा बैराज पर नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास किया।
यहां जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इनमें 63 करोड़ रुपये की लागत से सीसामऊ नाले की अवरोधन और दिशा परिवर्तन योजना, नेटवर्किं ग के लिए 397 करोड़ रुपये की नेटवर्किं ग योजना, बिठूर में नदी तट के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की योजनाएं और वहां 14 घाटों और पांच शवदाह गृहों का निर्माण शामिल है।
जल संसाधन मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस अवसर पर उमा भारती ने कहा कि उनका मंत्रालय हाइब्रिड एन्यूटी आधारित पीपीपी मॉडल के माध्यम से शोधित जल के पुन: इस्तेमाल के लिए बाजार विकसित करेगा, जिससे एसटीपी और ईटीपी से निकलने वाला जल वापस नदी में न जाए।
मंत्री ने कहा कि इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों के साथ समझौता ज्ञापन भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम गंगा जी के संरक्षण के लिए निर्धारित प्रक्रिया से गुजरेंगे। किसी भी जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेंगे, जिससे कि आवंटित धनराशि व्यर्थ न जाए।”
कार्यक्रम में अपने अध्यक्षीय संबोधन में कानपुर से सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा, “गंगा की आज जो दुर्दशा हो रही है, उसके लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। हमें गंगा के प्रति अपने स्वभाव में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है।”
उन्होंने सुझाव दिया कि गंगा का इतिहास बताने वाले एक दृश्य और श्रव्य कार्यक्रम के माध्यम से लोगों में इस अभियान के प्रति जागरूकता फैलाई जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा सात राज्यों – उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और हरियाणा- में नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाली गतिविधियों का क्रियान्वयन प्राथमिकता के तौर पर किया जा रहा है। इसी के तहत सात जुलाई, 2016 को सातों राज्यों में 231 परियोजनाओं का एक ही समय पर अलग-अलग स्थानों पर एक साथ शुभारंभ किया गया। इसमें विभिन्न घाटों के नवीनीकरण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का पुनर्वास एवं विकास, वृक्षारोपण व जैव विविधता संरक्षण की परियोजनाएं शामिल हैं। कानपुर में प्रवेश स्तर की गतिविधियों के अंतर्गत 11 घाटों और दो शवदाह गृहों के निर्माण का काम शुरू किया गया।
dharmpath.com dharmpath