कारपेट एरिया में न्यूनतम 9 वर्गमीटर की वृद्धि आवश्यक

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ‘निर्माण नीत लाभार्थी’ योजना के तहत केन्द्रीय सहायता प्राप्त करने के लिए मौजूदा आवास के कारपेट क्षेत्र में कम से कम 9 वर्गमीटर की वृद्धि आवश्यक होगी।

आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को रियायती आवास का प्रस्ताव भेजते वक्त ‘निर्माण नीत लाभार्थी'(बीएलसी) के तहत मकानों की वृद्धि करने के लिए इसे लागू करने हेतु संशोधित गाइडलाइन जारी की है।

बीएलसी के तहत लाभार्थियों को नए घर बनाने और वर्तमान घर के आकार को बड़ा करने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। प्रति लाभार्थी को 1.5 लाख रुपये की सहायता के लिए पक्के और अर्ध पक्के भवनों के कारपेट क्षेत्र में कम से कम 9 वर्गमीटर की वृद्धि जरूरी होगी। राष्ट्रीय भवन निर्माण के मानदंडों के अनुसार यह वृद्धि कम से कम रहने लायक एक कमरे या रसोईघर के रूप में हो सकती है।

नई गाइडलाइन में कह गया है कि कारपेट क्षेत्र में जरूरी 9 वर्गमीटर क्षेत्र के बाद कारपेट क्षेत्र का कुल वृद्धि 21 वर्गमीटर से कम और 30 वर्गमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। पीएमएवाई (शहरी) के बीएलसी घटक के तहत पहले से पक्का या अर्ध पक्का मकान का लाभ उठाने वाले पात्र अपने मकानों को रहने लायक बनाने के लिए इसके आकार में वृद्धि कर सकेंगे।

आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने शहरी क्षेत्र में आवास की कमी का पता लगाने के लिए तकनीक समूह का गठन किया है। इसकी रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्र में 1.49 करोड़ घरों को अति सघनता, 22.7 लाख मकान जर्जर और 9.9 लाख कच्चे मकानों को रहने लायक नहीं पाया है। इस रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्र में कुल 1.87 करोड़ मकानों की कमी है। इस अनुमान के आधार पर सरकार ने 2022 तक शहरी क्षेत्रों में 2 करोड़ घरों की जरूरत का अनुमान लगाया है।

इसके अलावा पीएमएवाई के अन्य घटकों में झुग्गी पुनर्विकास ,साझा रियायती आवास और कर्ज आधारित रियायती योजना का विकल्प लाभार्थी अपनी जरूरतों और आय के अनुसार चुन सकता है। केन्द्रीय सहायता प्रत्येक लाभार्थी को एक लाख से 2.30 लाख रुपये तक प्रदान की जाएगी। आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को लिए 43,922 करोड़ रुपये का 6.84 लाख रियायती मकानों के निर्माण की मंजूरी दी है। इसमें 10,050 करोड़ रुपये केन्द्रीय सहायता के रूप में शामिल है।

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