कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए ओला का ‘डू योर शेयर’ अभियान

नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। परिवहन मोबाइल एप ओला ने कार्बन उत्सर्जन की समस्या से निपटने के लिए ‘डू योर शेयर’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत ओला ने मुम्बई, दिल्ली और बंगलुरु में मुख्य स्थानों पर ‘बिलबोर्ड’ लगाने की योजना बनाई है जिसके द्वारा ‘ओला शेयर’ वाहन का इस्तेमाल करने वाले यात्री कार्बन उत्सर्जन के स्तर का पता लगा सकेंगे।

कंपनी ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि यह अभियान नागरिकों को ‘शेयर्ड मोबिलिटी’ (साथ मिलकर यात्रा) का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करेगा तथा पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद करेगा। इससे शहर में कार्बन उत्सर्जन के स्तर को कम किया जा सकेगा। अगस्त के पहले सप्ताह से इस अभियान की शुरूआत हो रही है।

अभियान के तहत तीनों शहर इस अवधि के दौरान कार्बन उत्सर्जन के निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे। सोशल मीडिया पर लाइव डिजिटल काउन्टर और ‘बिलबोर्ड’ रियल टाइम में कार्बन उत्सर्जन के स्तर को ट्रैक करेंगे। इस तरह यात्री शहर को हरित एवं भीड़भाड़ से रहित बनाने में अपना योगदान दे सकेंगे।

ओला का कहना है कि वह लाखों उपयोगकर्ताओं के सहयोग से तीनों शहरों बंगलुरु, दिल्ली और मुम्बई में कार्बन उत्सर्जन के स्तर को 1200 टन तक कम करना चाहती है। गौरतलब है कि तीनों शहर कार्बन उत्सर्जन में 400-400 टन का योगदान देते हैं।

इस बारे में ओला के हेड ऑफ कैटेगरीज एवं मुख्य विपणन अधिकारी रघुवेश सरूप ने बताया, “शेयर्ड मोबिलिटी स्थायी परिवहन की दिशा में एक नई मिसाल है। ओला के ‘डू योर शेयर’ अभियान के माध्यम से हम बड़ी संख्या में लोगों को ओला शेयर के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं, जिससे शहरों की सड़कों पर भीड़भाड़ एवं ट्रैफिक जाम जैसी समस्स्या को कम किया जा सके। हम इस अभियान को अन्य शहरों में भी ले जाना चाहते हैं। हम लाखों भारतीयों को परिवहन के सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराने के अपने मिशन के साथ-साथ देश को परिवहन के स्थायी साधन उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रहें हैं।”

डब्ल्यूआरआई इंडिया के बिजनेस एंगेजमेन्ट प्रमुख विवेक पी आधिया ने बताया, “स्थायी परिवहन को बढ़ावा देने वाले अभियान (जैसे ओला राइड शेयरिंग) पर्यावरण में कार्बन की मात्रा को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हमारा मानना है कि इस तरह की पहल जलवायु से जुड़े महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगी तथा पिछले साल पेरिस में हुए सीओपी-21 में भारत द्वारा कार्बन उत्सर्जन के स्तर में 33-35 फीसदी कमी लाने की प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में अपना योगदान देगी।”

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