भोपाल, 2 जुलाई (आईएएनएस)। फिल्म अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा गुरुवार को मध्य प्रदेश की राजधानी पहुंचीं। यहां के किशोरों से मुलाकात के बाद वह चिंता में पड़ गईं। उन्होंने कहा कि एनीमिया (खून की कमी) ने यहां के किशोरों की लंबाई और विकास रोक दिया है।
यूनिसेफ की सद्भावना राजदूत प्रियंका चोपड़ा ने किशोरों के एक समूह से मुलाकात की और पोषण सहित उनके जीवन को प्रभावित करने वाले विभिन्न मुद्दों, विशेष रूप से एनीमिया को रोकने के उपायों पर चर्चा की।
किशोरावस्था के मुद्दों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रियंका ने कहा कि एनीमिया किशोर बालकों और बालिकाओं एक ऐसी समस्या है, जिसका सरल और व्यावहारिक समाधान उपलब्ध है। यह समाधान है प्रति सप्ताह आयरन फोलिक एसिड (आईएफए) की नीली गोली और हर छह माह में कृमिनाशक गोली लेना।
ज्ञात हो कि दुनिया के सर्वाधिक किशोर (10 से 19 वर्ष) भारत में हैं, यानी एक अरब 20 करोड़ किशोरों में से 25 करोड़ 30 लाख भारत के निवासी हैं। देश में 15 से 19 वर्ष आयु समूह की 56 प्रतिशत बालिकाएं और 30 प्रतिशत बालक एनीमिया से ग्रस्त हैं। मध्यप्रदेश में 15-19 वर्ष आयु समूह की 57़ 6 प्रतिशत बालिकाओं और 24़ 4 प्रतिशत बालकों में एनीमिया है।
यूनिसेफ (इंडिया) के डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव जेम्स गिटायू ने कहा कि शोध में यह बात सामने आई है कि जीवन के पहले वर्ष के बाद किशोवस्था में शारीरिक विकास की दर सबसे तेज होती है। किशोरावस्था में यदि अच्छी तरह आहार और देखभाल मिले तो इस अवधि में वे अपने वयस्क वजन का 50 प्रतिशत, वयस्क ऊंचाई का 20 प्रतिशत से अधिक और हड्डी द्रव्यमान का 50 प्रतिशत तक प्राप्त करते हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के किशोर स्वास्थ्य प्रभाग की उपायुक्त डॉ़ सुषमा दुरेजा ने कहा कि एनीमिया भारत सरकार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है, इसलिए स्कूल जाने वाले किशोर और किशोरियों और स्कूल न जाने वाली किशोरियों के लिए साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड पूरकता कार्यक्रम पूरे देश में लागू किया गया है।
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