किसानों की खुदकुशी रोकने को ठोस नीति बनाए केंद्र : सर्वोच्च न्यायालय

नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को देश में किसानों की खुदकुशी की घटना को रोकने के लिए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा प्रदान करना इसका वास्तविक समाधान नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.एस.केहर, न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ तथा न्यायमूर्ति एस.के.कौल की सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि किसानों की खुदकुशी का मुद्दा ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’ है और आश्चर्यजनक है कि सरकार ने इन खुदकुशियों के पीछे के कारणों का समाधान करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया, जबकि यह कई दशकों से होता आ रहा है।

पीठ ने कहा कि वह दुखी है और दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि किसान फसल खराब होने और बकाए कृषि ऋण का भुगतान न कर पाने के कारण खुदकुशी कर रहे हैं।

पीठ ने अप्रसन्नता जताते हुए कहा, “हमें लगता है कि आप (सरकार) गलत दिशा में जा रहे हैं। किसान बैंक से ऋण लेते हैं और जब उसे अदा कर पाने में अक्षम हो जाते हैं, तो खुदकुशी कर लेते हैं। इसका समाधान किसानों की खुदकुशी के बाद उनके परिजनों को मुआवजा देना नहीं है, बल्कि इन घटनाओं को रोकने के लिए आपको योजना बनानी चाहिए।”

केंद्र सरकार ने न्यायालय से कहा कि उसने किसानों के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है और साल 2015 में लाई गई कृषि बीमा योजना से इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में तेजी से कमी आई है।

न्यायालय गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) रिसोर्स एंड एक्शन एंड इनिशिएटिव द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें गुजरात में कर्ज में डूबने के बाद खुदकुशी करने वाले किसानों के परिजनों को मुआवाजा देने की मांग की गई है।

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