चेन्नई, 17 फरवरी (आईएएनएस)। कुडनकुलम में स्थापित एक हजार मेगावाट क्षमता के परमाणु संयंत्र में यांत्रिक खराबी की वजह से विद्युत उत्पादन रोकना पड़ा है। यह जानकारी पॉवर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीओएसओसीओ) ने दी है।
यह इकाई चार फरवरी की रात टरबाइन भवन में फीड वाटर सिस्टम में स्टीम लीक की वजह से बंद करनी पड़ी थी। इसके बाद इसे 14 फरवरी को फिर से चालू किया गया था।
इससे पहले संयंत्र मरम्मत कार्य के लिए सात महीने बंद रहा था।
सात महीने की बंदी के बाद कहा गया था कि इकाई में सभी परीक्षण कर लिए गए हैं। देश में परमाणु बिजली संयंत्रों के संचालक भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) की तरफ से संतोषजनक उत्तर मिलने के बाद परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड (एईआरबी) ने इसे फिर से शुरू करने की इजाजत दी थी।
पीओएसओसीओ के मुताबिक, संयंत्र में बिजली उत्पादन मंगलवार शाम 6.45 बजे रोकना पड़ा। एनपीसीआईएल को रोजाना पांच करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उम्मीद है कि इकाई 21 फरवरी से फिर से शुरू हो जाएगी।
एनपीसीआईएल तिरुनेलवेली के कुडनकुलम में एक हजार मेगावाट के दो परमाणु संयंत्र स्थापित कर रहा है।
पहली इकाई में जुलाई 2013 में परमाणु विखंडन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसे अक्टूबर 2013 में दक्षिणी ग्रिड से जोड़ दिया गया। व्यावसायिक रूप से बिजली का उत्पादन यहां 31 दिसंबर, 2014 को शुरू हुआ।
इस इकाई में कई बार गड़बड़ियां सामने आईं। कई डेडलाइन बीतने के बाद 21 जनवरी, 2016 को फिर से इसके रिएक्टर में परमाणु विखंडन प्रक्रिया शुरू हो सकी और 30 जनवरी को इसे दक्षिणी ग्रिड से जोड़ दिया गया।
आधिकारिक तौर पर बताया गया है कि एक हजार मेगावाट की दूसरी इकाई में परमाणु विखंडन की प्रक्रिया इसी साल किसी समय शुरू हो जाएगी।
लेकिन, जानकार सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि दूसरी इकाई में कामकाज अगले साल ही शुरू होने के आसार हैं।
एईआरबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल ही में आईएएनएस को बताया था कि दूसरी इकाई से संबंधित रपटों का अध्ययन किया जा रहा है। इनके अध्ययन के बाद बोर्ड कुछ शर्ते रखेगा। इन्हें पूरा करने के बाद एनपीसीआईएल इस इकाई के रिएक्टर में ईंधन भरने की अनुमति मांगेगा।
एईआरबी ने कुडनकुलम की तीसरी और चौथी इकाई के निर्माण के लिए जगह के अध्ययन की इजाजत दे दी है। इन दो इकाइयों पर 40 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
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