कुलभूषण खरबंदा के लिए भूमिका छोटी-बड़ी क्या! (जन्मदिन : 21 अक्टूबर)

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश बंटने के बाद पाकिस्तान से आया एक बंदा बॉलीवुड में कुटिल मुस्कान वाले खलनायक शाकाल के रूप में जाना जाने लगा, नाम कुलभूषण खरबंदा और वह फिल्म थी वर्ष 1980 के दशक की ‘शान’ जिसने इस बंदे को खलनायकी के बावजूद लोकप्रिय बना दिया।

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश बंटने के बाद पाकिस्तान से आया एक बंदा बॉलीवुड में कुटिल मुस्कान वाले खलनायक शाकाल के रूप में जाना जाने लगा, नाम कुलभूषण खरबंदा और वह फिल्म थी वर्ष 1980 के दशक की ‘शान’ जिसने इस बंदे को खलनायकी के बावजूद लोकप्रिय बना दिया।

कुलभूषण ने बॉलीवुड में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी है। वह 1974 के दशक से लेकर अब भी सक्रिय हैं। उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि किसी फिल्म में उनकी भूमिका कितनी छोटी है या बड़ी, बसअपने दमदार अभिनय से किरदार में जान डाल दी। वह खुद को एक चरित्र अभिनेता मानते हैं।

कुलभूषण खरबंदा का जन्म 21 नवंबर, 1944 में हसन अब्दाल में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनका परिवार विभाजन के बाद भारत आ गया था। उन्होंने जोधपुर, देहरादून, अलीगढ़ और दिल्ली से अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक किया।

वह माहेश्वरी देवी खरबंदा के साथ शादी के बंधन में बंधे। उनकी दो बेटियां हैं- कीर्ति खरबंदा और श्रुति खरबंदा।

कुलभूषण ने अपने करियर की शुरुआत 1964 में बतौर थिएटर आर्टिस्ट शुरू की। हिंदी सिनेमा में आने से पहले इन्होंने कई वर्षो तक थिएटर आर्टिस्ट के रूप में काम किया।

वर्ष 1974 में खरबंदा को बॉलीवुड में पहला ब्रेक श्याम बेनेगल ने अपनी फिल्म ‘निशांत’ में दिया। इसमें उनके अभिनय को बेहद सराहा गया। इसे दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों ने भी खूब पसंद किया।

खरबंदा ने अब तक के फिल्मी करियर में कई फिल्मों में बड़े-बड़े कलाकारों के साथ काम किया है। उन्होंने सिर्फ साकारत्मक किरदार ही नहीं, बल्कि नकारत्मक भूमिकाएं भी बेजोड़ तरीके से निभाईं।

उन्होंने ‘कुर्बान’, ‘यस बॉस’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘ईएमआई’, ‘गर्व’,’पिंजर’, ‘हेराफेरी’, ‘दामिनी’, ‘बेखुदी’, ‘हिना’, ‘त्रिकाल’, ‘यतीम’, ‘वीरना’, ‘जेड प्लस’, ‘हैदर’, ‘खट्टा-मीठा’, ‘शान’, ‘जूनूनन सोलवां सावन’, ‘रिफ्यूजी’, ‘मोहरा’, ‘शक्तिमान’, ‘काल’, ‘माचिस’, ‘लगान’, ‘लोफर’, ‘राम तेरी गंगा मैली’, ‘खुशियां’, ‘बॉर्डर’ जैसी चर्चित फिल्मों में काम किया।

वह 1986 की फिल्म गुलामी के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीत चुके हैं।

अपने लंबे करियर में खरबंदा ने जहां ‘मंडी’ और ‘अर्थ’ जैसी रचनात्मक फिल्मों में काम किया है, वहीं ‘शान’ और ‘बॉर्डर’ जैसी व्यावसायिक फिल्मों में भी शानदार अभिनय किया।

इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में एक लघुफिल्म ‘स्कैंडल पॉइंट’ में अभिनेत्री फरीदा जलाल के साथ काम किया है।

कुलभूषण खरबंदा के जन्मदिन पर हम उनकी लंबी उम्र की कामना करते हैं, ताकि वह इसी तरह दर्शकों का मनोरंजन करते रहें।

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