नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि सरकार जल्द खराब हो जाने वाले कृषि उत्पादों के भंडारण के लिए तेजी से काम कर रही है, ताकि किसान अपने फसलों की बेहतर मार्केटिंग कर अपनी आय बढ़ा सकें।
कृषि मंत्री ने यह बात शनिवार को यहां विज्ञान भवन में आयोजित खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता कार्य के प्रभारी राज्य मंत्रियों एवं संबंधित केन्द्रीय मंत्रियों की बैठक में कही।
सिंह ने कहा, “भारत ने विश्व में सर्वाधिक शीत भंडारण क्षमता स्थापित की है, जो लगभग 3.2 करोड़ टन है। पिछले दो वर्षों के दौरान 10 लाख टन क्षमता से भी अधिक लगभग 250 परियोजनाएं शामिल की गई हैं। अब बागवानी क्षेत्र कृषि संबंधी उपार्जन का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है।”
उन्होंने आगे कहा, “अब हमें यह सुनिश्चित करना है कि खराब हो जाने वाली फसलों से संबंधित किसान अब अपने विपणन दायरे को विस्तारित कर सकें। इसके लिए शीत भंडार गृहों और अन्य संबंधित अवसरंचनाओं पर ध्यान दिया जाएगा।”
सिंह ने कहा, “आठ राज्यों की 21 मंडियों में 14 अप्रैल, 2016 को राष्ट्रीय कृषि मंडी पोर्टल को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया। कुल मिलाकर 25 कृषिगत जिंसों, जिनके लिए व्यापारिक मानदंड बनाए गए हैं, उन्हें योजना के तहत ऑनलाइन व्यापार करने की अनुमति दे दी गई है।”
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा, “राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत 2013-14 तक चावल, गेंहूं एवं दलहन फसलें ही शामिल थीं, लेकिन अब मोटे अनाज, गन्ना, जूट, कपास भी शामिल हो गए हैं। पहले 19 राज्य शामिल थे, जो अब बढ़कर 29 हो गए हैं। पहले 482 जिले शामिल थे, अब 638 हो गए हैं।”
सिंह ने कहा, “दालों की बढ़ रही मांग पूरी करने के लिए प्रमुख 475 कृषि विज्ञान केन्द्रों को शामिल करते हुए बड़ी संख्या में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन प्रांरभ किए गए। वर्ष 2015-16 के दौरान कुल मिलाकर 22,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर 60,000 से भी अधिक प्रदर्शन आयोजित किए गए।”
उनहोंने कहा, “राष्ट्रीय तिलहन एवं तेल ताड़ मिशन 2013-14 में 14 राज्य थे, अब 24 राज्य शामिल हो गए हैं। जलवायु सहिष्णु किस्में (सूखा प्रतिरोधी एवं बाढ़ सहनशील) वर्ष 2014 से 2016 तक अनाज की 19, दलहन की 20 एवं तिलहन की 24 जारी की गई हैं।”
कृषि मंत्री ने कहा, “12वीं योजना के अंत तक वनस्पति तेल उत्पादन 24 लाख टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय तिलहन और ऑयल पाम मिशन को कार्यान्वित किया जा रहा है।”
कृषि मंत्री ने इस अवसर पर राज्यों से आग्रह किया वे केन्द्र की कृषि योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मिलकर काम करें, ताकि खाद्य उत्पादन में इजाफा हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के उत्पादों के लिए पारिश्रमिक मूल्य सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार का कार्यान्वयन भी आवश्यक है।
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