चेन्नई, 11 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने नए बांध के निर्माण को लेकर को लेकर केरल के पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) से संबंधित अनुरोध को मंजूरी देने के केंद्र सरकार के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमाना बताया है।
जयललिता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया पत्र गुरुवार को सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन्होंने लिखा है, “केरल के अनुरोध पर गौर करना और उसे मंजूरी देना..सर्वोच्च न्यायालय के सात मई 2014 को दिए गए फैसले की अवमानना है।”
जयललिता ने कहा, “केंद्र सरकार को केरल का अनुरोध मंजूर नहीं करना चाहिए था और प्रस्ताव उन्हें वापस कर देना चाहिए था।”
जयललिता ने केरल के इडुक्की जिले में नए मुल्ला पेरियार बांध के निर्माण से संबंधित पर्यावरण प्रभाव आकलन की सलाह पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के गौर करने के बाद मोदी को पत्र लिखा।
जयललिता ने कहा, “ऐसी परिस्थिति में मैं आपके व्यक्तिगत हस्तक्षेप की उम्मीद करती हूं और आग्रह करती हूं कि आप मंत्रालय और उससे संबंधित एजेंसियों को निर्देश देंगे कि भविष्य में केरल के प्रस्ताव को मंजूरी न दें और इसे केरल सरकार को वापस सौंप दें।”
जयललिता के मुताबिक, जबकि मुल्ला पेरियार बांध के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय अंतिम फैसला दे चुका है, केरल गुपचुप तरीके से इस फैसले को पलटने की कोशिशों में जुटा है।
उन्होंने कहा, “तमिलनाडु ने पहले ही केरल के पर्यावरण प्रभाव आकलन संबंधी अनुरोध पर तत्काल रोक लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप करने की मांग की है और सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करने के अपने अधिकार सुरक्षित कर लिए हैं। यह फैसला न्यायालय ने जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है।”
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