नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (आईडीबीआई) के निजीकरण के प्रस्तावित का शुक्रवार को विरोध किया और इसे सरकारी बैंक के रूप में बनाए रखने का समर्थन किया।
आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को यहां केजरीवाल से मुलाकात की और केंद्र सरकार द्वारा इस बैंक में सरकार की हिस्सेदारी को 50 फीसदी से कम करने के प्रस्ताव पर विरोध जताया। इसके बाद केजरीवाल ने उनका समर्थन किया।
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने कहा, “केजरीवाल ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के प्रस्ताव का विरोध किया। सरकार के इस कदम से देश भर में इसके लगभग 20 हजार कर्मचारी प्रभावित होंगे। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे प्रस्तावित कदम को वापस लेने के लिए प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखेंगे।”
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 29 फरवरी को लोकसभा में अपने बजट भाषण में कहा था कि आईडीबीआई में कम से कम 51 फीसदी हिस्सेदारी रखने का केंद्र सरकार का कोई दायित्व नहीं है, इसलिए सरकार इसके निजीकरण की घोषणा कर रही है।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि उनकी घोषणा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा संसद में दिसंबर 2003 में दिए गए आश्वासन का उल्लंघन है। साल 2003 में आईडीबीआई के निजीकरण का मुद्दा अंतिम बार संसद में उठा था।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इसका निजीकरण करने के लिए आईडीबीआई की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के गलत ढंग से प्रदर्शन को कारण बनाया जा रहा है।
आईडीबीआई के अधिकारियों ने कहा कि 19 हजार करोड़ रुपये का एनपीए का आंकड़ा गलत है, क्योंकि इसका 50 फीसदी हिस्सा बकाया राशि है, जो उगाही करने योग्य है।
आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के विरोध में बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने 28-31 मार्च तक चार दिवसीय हड़ताल की थी।
dharmpath.com dharmpath