कोलकाता, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। टेरी के महानिदेशक अजय माथुर ने शुक्रवार को यहां कहा कि भारत को नई प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और उसे सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए, तभी जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय स्तर पर योगदान की प्रतिबद्धता पूरी की जा सकती है।
द इनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) के माथुर ने बंगाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित ‘सीओपी 21 : भारत पर असर’ शीर्षक पर एक संगोष्ठी में कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि नई प्रौद्योगिकियां सामने आती रहें और उनका इस्तेमाल व्यापक स्तर पर हो। इसमें सबसे बड़ी चुनौती लागत घटाने की होगी।”
माथुर संयुक्त राष्ट्र द्वारा जलवायु परिवर्तन पर पेरिस में संपन्न हुए ‘सीओपी 21’ सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रवक्ता थे।
माथुर ने बिजली संतुलन के लिए बाजार सृजन पर जोर देते हुए कहा, “जब हम बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा का प्रयोग करेंगे तो वितरण कंपनियों को आश्चर्य होगा कि जब धूप नहीं हो या हवा नहीं चल रही हो तो वे किस प्रकार बिजली की आपूर्ति करेंगी। इसलिए हमें उस चीज की जरूरत है, जिसे बैलेंसिंग पॉवर (बिजली संतुलन) कहा जाता है और वह भी कम लागत पर।”
उन्होंने कहा कि तीसरा पहलू यह है कि हमें सस्ती प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापार मॉडल बनाना होगा।
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