पणजी, 27 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनाव पूर्व फर्जी सर्वेक्षणों के लिए जाना जाता है, गोवा और पंजाब विधानसभा के होने जा रहे चुनावों में आप की जीत का आकलन भी उन्हीं में से है। यह बात शनिवार को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने यहां कही।
उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल प्रख्यात चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव से इसलिए अलग हो गए, क्योंकि यादव ने चुनाव सर्वेक्षण में हेराफेरी करने से इनकार कर दिया था।
दिग्विजय ने कहा, “आम आदमी पार्टी (आप) के नेता (केजरीवाल) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की उस सांठ-गांठ का हिस्सा हैं, जिसे दोनों दलों ने कांग्रेस पार्टी को भारतीय राजनीति से मिटाने के लिए किया है।”
दिग्विजय ने कहा, “यह कोई मायने नहीं रखता कि केजरीवाल क्या कहते हैं। उन्हें फर्जी सर्वेक्षण कराने, जारी करने और उन्हें प्रकाशित करने के लिए जाना जाता है। योगेंद्र यादव और उनके बीच विवाद का यह एक प्रमुख कारण था। यादव सबसे विश्वसनीय और साख वाले चुनाव विश्लेषकों में एक हैं।”
उन्होंने कहा, “केजरीवाल चाहते थे कि यादव फर्जी सर्वे कराएं, जिससे यादव ने इनकार कर दिया था।”
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि संघ से मिलकर आप और भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस मुक्त भारत के लिए काम कर रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल संघ से जुड़े विचार मंच ‘विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन’ की एक बैठक में शामिल थे। यह वही संस्था है, जिसने नरेंद्र मोदी के लोकसभा चुनाव अभियान की रणनीति बनाई थी।
दिग्विजय ने कहा, “मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि या तो इसे स्वीकार करें या इससे इनकार करें। क्या वह विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की उस परिचर्चा का संघ के साथ हिस्सा नहीं थे, जिसमें मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में चुनने की रणनीति बनाई गई थी?
उन्होंने भारतीय राजस्व सेवा(आईआरएस) के अधिकारी के रूप में केजरीवाल की साख पर भी सवाल उठाया और दावा किया कि आप नेता अपनी सेवा अवधि के अधिकांश समय विश्राम ही करते रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “यदि आप आईआरएस का करियर देखें तो उन्होंने कभी भी दिल्ली के बाहर नौकरी नहीं किया और अधिकांश समय वह अध्ययन अवकाश पर ही रहे। हर नौकरशाह जो अध्ययन अवकाश पर होता है, उसे एक रपट देनी होती है। केजरीवाल ने वह रपट कभी नहीं दी। कर चोरी रोकने का उनका रिकार्ड क्या है? उन्होंने इसके बारे में कभी नहीं बोला।”
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