केरल : कई छोटे दल वाम मोर्चे में शामिल होने के इच्छुक

तिरुवनंतपुरम, 13 मार्च (आईएएनएस)। केरल में विधानसभा चुनाव से पहले कई छोटे दल और सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के असंतुष्ट दल वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) में शामिल होने के लिए आतुर दिख रहे हैं। एलडीएफ का नेतृत्व कर रही मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के दरवाजे पर छोटे दलों की भीड़ सी लगी हुई है।

तिरुवनंतपुरम, 13 मार्च (आईएएनएस)। केरल में विधानसभा चुनाव से पहले कई छोटे दल और सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के असंतुष्ट दल वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) में शामिल होने के लिए आतुर दिख रहे हैं। एलडीएफ का नेतृत्व कर रही मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के दरवाजे पर छोटे दलों की भीड़ सी लगी हुई है।

एलडीएफ में माकपा के अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), जनता दल (सेक्युलर) और केरल कांग्रेस (स्कारिया थामस) शामिल हैं।

इंडियन नेशनल लीग और फारवर्ड ब्लाक मोर्चे के पूर्ण सदस्य नहीं बल्कि सहयोगी हैं।

अब वाम मोर्चे में जनाधिपत्य समरक्षणा समिति (जेएसएस) और कम्युनिस्ट मार्क्‍सिस्ट पार्टी (सीएमपी) शामिल होना चाह रही हैं। जेएसएस की स्थापना पूर्व माकपा नेता के. आर. गौरी ने और सीएमपी की स्थापना भी पूर्व माकपा नेता दिवंगत एम.वी.राघवन ने की थी। ये दोनों पार्टियां अभी तक सत्तारूढ़ यूडीएफ का हिस्सा थीं।

केरल में मतदाताओं का रुझान या तो यूडीएफ की तरफ रहता है या फिर एलडीएफ की तरफ। इसलिए छोटे दलों की कोशिश होती है कि वे इनमें से किसी एक के साथ रहें।

गौरी बीते हफ्ते 22 साल बाद अपनी पूर्व पार्टी के मुख्यालय गई थीं। वह इन संभावनाओं की तलाश में वहां गई थीं कि क्या एलडीएफ में शामिल होकर उन्हें कुछ सीट मिल सकती हैं?

सीएमपी में फूट पड़ चुकी है। पार्टी के एक धड़े का झुकाव वाम मोर्चा की तरफ है। मीडिया उद्योग से संबंध रखने वाले और दिवंगत राघवन के पुत्र एम.वी.निकेश ने खुद के लिए एक सीट की चाह में शनिवार को माकपा नेताओं से मुलाकात की थी।

दलीय विभ्रम की स्थिति को आर. बालकृष्ण पिल्लई की बातों ने और बढ़ाया है। पिल्लई ने 70 के दशक के शुरू में यूडीएफ की स्थापना की थी। उनकी केरल कांग्रेस (पिल्लई) ने यूडीएफ में अपना कामकाज समेट लिया है। पिल्लई के बेटे और पार्टी के एकमात्र विधायक के.बी.गणेश कुमार के बारे में माना जा रहा है कि उन्हें माकपा की तरफ से कोल्लम जिले की पाथनापुरम सीट से चुनाव लड़ने की हरी झंडी मिल चुकी है। वह अभी इसी सीट से विधायक हैं।

भ्रष्टाचार के आरोप में एक साल जेल में काट चुके पिल्लई बेताबी से चाह रहे हैं कि माकपा उनके लिए भी एक सीट छोड़ दे।

इनके अलावा छह बार विधायक रह चुके पी.सी.जार्ज हैं। उन्होंने यूडीएफ के तीसरे बड़े घटक दल केरल कांग्रेस मणि को बीते साल छोड़ दिया था। इसके बाद उन्हें विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य घोषित कर दिया गया था। उन्होंने भी माकपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की है। वह वाम मोर्चा के सहयोग से पूंजर सीट पर चुनाव लड़ना चाह रहे हैं।

यूडीएफ में शामिल तीन विधायकों वाली रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) में बीते महीने फूट पड़ गई। उसके विधायक कोवूर कंजुमोन ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देकर वाम मोर्चे का दामन थाम लिया है। उनकी स्थिति पी.सी जार्ज जैसी नहीं है। माकपा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया है। वह वाम मोर्चे की तरफ से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

पूर्व सांसद फ्रांसिस जार्ज और केरल कांग्रेस मणि में उनके सहयोगियों ने केरल कांग्रेस (डेमोक्रेटिक) नाम से पार्टी बनाई है। इस पार्टी ने एलडीएफ का दामन थामने का फैसला किया है।

भाकपा ऐन चुनाव से पहले इतने दलों के एलडीएफ की तरफ आने से खुश नहीं है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह अपने हिस्से की एक भी सीट नहीं छोड़ेगी।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493