तिरुवनंतपुरम, 5 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के प्रमुख सहयोगी केरल कांग्रेस-मणि के बीच दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं। केरल विधानसभा में अब यह पार्टी अलग गुट बनाकर बैठ सकती है।
नाम ने छापने की शर्त पर केसी-मणि के एक वरिष्ठ नेता ने कहा,”हमने अपनी पार्टी का दो दिवसीय शिविर आयोजित किया है। हम रविवार को अपने निर्णण की घोषणा करेंगे।”
मणि अपनी पार्टी के सर्वोच्च नेता हैं। वह कांग्रेस पार्टी के व्यवहार से आहत हैं। उनकी पार्टी यूडीएफ की तीसरी बड़ी घटक है।
मणि ने कहा, “हम साल 1982 से यूडीएफ के अभिन्न घटक हैं। हमारी पार्टी यूपीए सरकार में सहयोगी रही। लेकिन इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को एक मंत्री पद दिया, परंतु हमें एक भी मंत्री पद नहीं मिला।”
मणि की एक और शिकायत यह है कि जब साल 2016 विधानसभा चुनाव के लिए सीटें बांटी गईं तो यूडीएफ को नौ अतिरिक्त सीटें दी गईं। लेकिन केरल-कांग्रेस मणि को एक भी सीट नहीं दी गई और हमें 15 सीटों से संतोष करना पड़ा, जो 2011 में पार्टी को मिली थीं।
केरल कांग्रेस-मणि के नेता जोसेफ एम. पुतुशेरी को तिरुवल्ला विधानसभा सीट देकर राज्यसभा के उपसभापति पी.जे.कुरियन के साथ नाराजगी पैदा कर दी गई।
असंतुष्ट पार्टी के नेता ने कहा,”16 दिनों तक वह पुतुशेरी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए रहे और किसी कांग्रेसी नेता ने कुरियन के खिलाफ आवाज नहीं उठाई। बार घोटाले के समय कांग्रेस नेतृत्व ने मणि के खिलाफ त्वरित जांच बिठाकर उनका अपमान किया। लेकिन उन्होंने राज्य के मंत्रियों रमेश चेन्नीथला और वी.एस. शिवकुमार के खिलाफ कुछ नहीं किया, जबकि इनका नाम बार मालिकों से कथित तौर पर रिश्वत लेने वालों में आया था।”
बीते 10 सालों में वरिष्ठ यूडीएफ नेताओं ने मणि को चुप कराने की कोशिश की, लेकिन अब ऐसा लगता है कि पार्टी अलग गुट के तौर पर विधानसभा में बैठेगी।
मणि की पार्टी के छह विधायक हैं। यूडीएफ के पास 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में 47 सदस्य हैं।
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