तिरुवनंतपुरम, 26 जनवरी (आईएएनएस)। केरल के पुनर्निर्माण के लिए ‘सच्ची राजनीतिक एकता’ की जरूरत है। राज्यपाल पी. सतशिवम ने शनिवार को यह बात कही।
प्रभावशाली परेड की सलामी लेने और पुलिस व अन्य अधिकारियों को पुरस्कार प्रदान करने के बाद यहां अपने गणतंत्र दिवस संबोधन में राज्यपाल ने विकास गतिविधियों में एकता का आह्वान किया।
वह पिछले साल अगस्त में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित केरल और राज्य के पुनर्निर्माण के लिए सरकार के प्रयासों के संदर्भ में बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “हम संकीर्ण राजनीति को हमारी प्राथमिकताओं को प्रभावित करने की इजाजत नहीं दे सकते। हमें उन क्षेत्रों को तय करने में सच्ची राजनीतिक एकता की जरूरत है, जो पुनर्निर्माण में प्राथमिकता के लायक हैं।”
सतशिवम ने कहा, “ऐसे वक्त पर जब बाढ़ के आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय, सांस्कृतिक, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव का आकलन कर पाना मुश्किल है, उस वक्त में हमें अनावश्यक विवादों से बचने के लिए एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।”
उन्होंने यूएन पोस्ट डिसास्टर नीड असिस्टेंट रिपोर्ट में बाढ़ से हुए नुकसान के आंकलन का जिक्र किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल को पुनर्निर्माण पहलों के लिए 31 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता घरों और सड़कों के पुनर्निर्माण की है, लेकिन हमारे किसानों सहित कईयों को हुए रोजी-रोटी के नुकसान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे कहीं ज्यादा, हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि पुनर्निर्माण की प्रत्येक गतिविधि अधिक पारदर्शी तरीके से चले।”
उन्होंने पिछले साल राज्य की प्रगति के लिए केरल के लोगों की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा, “हमारे अनुभव से हम जानते हैं कि कठिनाई भी एकजुटता की एक मजबूत ताकत हो सकती है। जैसा कि हम खुद एक सबूत हैं कि हमारे लोगों ने बाढ़ से कैसे डटकर सामना किया, जिसने हमारे राज्य की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया था।”
राज्यपाल ने कहा, “मुझे गर्व है कि हमारे लोगों की मजबूत इच्छाशक्ति की जीत हुई और बाढ़ के प्रति हमारी एकजुट प्रतिक्रिया पूरे देश के लिए एक मॉडल साबित हुई।”
सतशिवम ने कहा, “हमारे लोग, विशेषकर युवा खुद से एकजुट हुए और हमारे मछुआरे वर्दीधारी बलों के साथ मिलकर सैकड़ों लोगों को बचाने के लिए आगे आए।”
राज्यपाल ने बार-बार बंद के खिलाफ भी बात कही।
उन्होंने कहा, “हमें खुद से यह भी पूछने की जरूरत है कि हम कैसे हिंसक प्रदर्शन और लगातार हड़तालों की इजाजत दे सकते हैं, जो सामान्य जनजीवन को बाधित करती हैं और हमारे राज्य की छवि धूमिल करती हैं।”
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