तिरुवनंतपुरम, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल में शीर्ष सरकारी पदों पर वरिष्ठ माकपा नेताओं के परिजनों की नियुक्ति मामले में लपेटे में आने के बाद, मुख्यमंत्री पिनारई विजयन सरकार ने गुरुवार को भाई-भतीजावाद की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए कानून बनाने का फैसला किया।
राज्य के उद्योग मंत्री ई.पी. जयराजन के खिलाफ लगे भाई-भतीजावाद के आरोपों के बाद अपनी पहली मंत्रालयी बैठक में विजयन ने इसके खिलाफ मजबूत रुख अपनाया और इस तरह की चीजें दोबारा न घटित हों इसके लिए एक नए तरह का कानून बनाने का फैसला किया है।
मंत्रालय की बैठक के बाद, मुख्यमंत्री विजयन के कार्यालय ने एक बयान जारी कर इस तरह के घटनाओं को रोकने के लिए नए कानून बनाए जाने की बात कही।
बयान में कहा, “यह फैसला किया गया है कि मुख्य सचिव एस.एम. विजयानंद सभी की गई नियुक्तियों की समीक्षा करेंगे। अब से राज्य के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के शीर्ष पदों पर नियुक्तियां एक विशेषज्ञ समिति करेंगी और पदों पर चयनित होने वाले को सर्तकता विभाग से अनापत्ति हासिल करनी होगी।”
विजयन सरकार के पदभार ग्रहण करने के चार महीने के भीतर लोकसभा सदस्य पी.के. श्रीमैथी और जयराजन के भतीजे पी.के. सुधीर की नियुक्ति को लेकर सरकार की साख गिर गई।
केरल स्टेट इंडस्ट्रियल इंटरप्राइसेस के प्रबंध निदेशक के तौर पर नियुक्त किए गए जयराजन के भतीजे सुधीर और एक दूसरी भतीजी, जिसे केरल क्ले एंड सिरेमिक्स लिमिटेड का महाप्रबंधक बनाया गया के पास नियुक्ति के लिए न तो योग्यता थी और न अनुभव।
मीडिया में बड़ी चर्चा की वजह से उन्हें अपने पद इस्तीफा देना पड़ा।
इनके साथ ही माकपा के तीन शीर्ष नेताओं की संतानों को भी ऊंचे पदों पर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में तैनाती दी गई थी। इसकी सोशल मीडिया में कड़ी आलोचना की गई।
इस बीच, जयराजन के खिलाफ उनकी की गई नियुक्तियों को लेकर सर्तकता अदालत में गुरुवार को एक जनहित याचिका दाखिल की गई। मामले को अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
मुख्यमंत्री विजयन से गुरुवार सुबह सर्तकता निदेशक जैकब थामस ने मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कानून विशेषज्ञों से जानकारी ली। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री इस मामले में एक जांच की घोषणा कर सकते हैं।
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