तिरुवनंतपुरम, 19 मई (आईएएनएस)। केरल में वाम मोर्चा सत्ता में वापसी करने के लिए तैयार है। राज्य की 140 सीटों में उसने 87 सीटों पर बढ़त बना ली है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पहली बार यहां खाता खोलने की उम्मीद कर रही है।
राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) 51 सीटों पर आगे है।
मार्क्सवादी कम्युस्टि पार्टी (माकपा) के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस.अच्युतानंदन ने इसे वाम मोर्चे के पक्ष में लहर करार दिया।
अच्युतानंदन ने कहा, “यह जनादेश भ्रष्टाचार और महिलाओं के सम्मान की रक्षा में असफल रहने वालों के खिलाफ है।”
मुख्यमंत्री ओमन चांडी निराश दिखाई दिए। हालांकि, वह स्वयं पतुपल्ली सीट से आगे हैं।
चांडी को गुरुवार सुबह पूरे आत्मविश्वास में देखा गया। उन्हें पूरा विश्वास था कि यूडीएफ सत्ता में बरकरार रहने में कामयाब रहेगी।
यूडीएफ को एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम के अलावा कोल्लम और त्रिशूर जैसे जिलों में करारा झटका लगा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री भाजपा के दिग्गज नेता ओ.राजगोपाल नेमोम सीट पर बढ़त बनाए हुए है। यदि उनकी जीत होती है तो वह केरल विधानसभा में प्रवेश करने वाले पहले भाजपा नेता होंगे।
इसके अलावा, एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी एक सीट पर बढ़त बनाई हुई है।
राज्य के पांच मंत्री पीछे चल रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री ओमन चांडी, मार्क्सवादी नेता वी.एस.अच्युतानंदन और पिनारई विजयन आगे चल रहे हैं।
राज्य में कुल 1,203 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला होना है। अधिकांश एग्जिट पॉल में वाम मोर्चे की जीत का अनुमान लगाया गया था।
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