तिरुवनंतपुरम, 19 जुलाई (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मंगलवार को कहा कि केरल सरकार कैबिनेट के फैसले से संबंधित सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई एक्ट) के आशय को समझने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करेगी।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि उनकी सरकार का इरादा कैबिनेट के फैसलों को छिपाना नहीं है और इस मुद्दे पर वह न्यायालय की राय लेगी। यह कदम सीआईसी द्वारा एक आरटीआई के माध्यम से कैबिनेट के फैसलों के विस्तृत विवरण की मांग के बाद सामने आया है।
सत्तासीन होने के बाद विजयन सरकार ने कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन नहीं किया है।
कांग्रेस ने विजयन की सरकार पर कैबिनेट के फैसलों के प्रति लोगों को अंधेरे में रखने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जनसंपर्क करना उनका काम नहीं है, जैसा पिछली सरकार करती थी।
मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के विधायक वी.डी.सतीशन ने मंगलवार को कहा कि यह आश्चर्यचकित करने वाली बात है कि मुख्यमंत्री संवाददाता सम्मेलन को जनसंपर्क का काम समझते हैं।
सतीशन ने कहा, “जब आप (विजयन) विपक्ष में थे, तो ओमन चांडी की पिछली सरकार को पारदर्शिता बरतने की सलाह दिया करते थे, लेकिन एक मुख्यमंत्री के रूप में आप खुद इस सिद्धांत का पालन नहीं कर रहे।”
सतीशन के सवाल पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारा इरादा चीजों को छिपाकर रखने का नहीं है। कैबिनेट की एक उप-कमेटी चांडी सरकार द्वारा एक जनवरी से 31 मार्च तक लिए गए फैसलों का अध्ययन कर रही है और जब यह पूरा हो जाएगा, तो हम सब कुछ सार्वजनिक कर देंगे। हमारी इच्छा आरटीआई अधिनियम पर कुछ स्पष्टीकरण पाने की भी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि क्या कांग्रेस के किसी भी प्रधानमंत्री ने कैबिनेट के फैसलों से लोगों को अवगत कराने के लिए संवाददाता सम्मेलन किया था।
विजयन के सवाल पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के बजाय कांग्रेस सदस्यों ने विधानसभा से बहिर्गमन करने का फैसला किया।
नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथाला ने कहा, “मुख्य सचिव को सुनिश्चित करना चाहिए कि कैबिनेट के फैसलों से 48 घंटों के अंदर अवगत करा दिया जाए। लेकिन, कैबिनेट के फैसले जानने के लिए आरटीआई का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि एलडीएफ सरकार कैबिनेट के फैसलों को छिपा रही है।”
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