तिरुवनंतपुरम, 29 दिसंबर (आईएएनएस)। केरल की सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के मंगलवार के उस फैसले की प्रशंसा की, जिसमें शीर्ष अदालत ने न केवल केरल उच्च न्यायालय के फैसले बल्कि मुख्यमंत्री ओमन चांडी के नेतृत्व वाली सरकार की शराब नीति को भी बरकरार रखा।
केरल सरकार की नई शराब नीति के अनुसार, राज्य में केवल 27 पांच सितारा होटलों के बार में शराब परोसने की इजाजत होगी।
केरल के आबकारी मंत्री के. बाबू ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय के फैसला सुनाने के बाद संवाददाताओं को बताया, “हमें खुशी है कि सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने हमारे निर्णय को सही ठहराया। हम अब हमारे शराब-विरोधी अभियान कार्यक्रमों को पुरजोर तरीके से आगे बढ़ाएंगे, क्योंकि हम इस बुराई को हमारे समाज से दूर करना चाहते हैं।”
इस साल मार्च में केरल के उच्च न्यायालय ने राज्य की नई शराब नीति को बरकरार रखा एवं इसके खिलाफ दाखिल की गई केरल बार होटल ओनर्स एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ अध्यक्ष राज कुमार उन्नी की अगुवाई में होटल एसोसिएशन ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस बाबत मंगलवार को अपना फैसला सुनाया, जिसके मुताबिक, राज्य में एक अप्रैल से केवल 27 पांच सितारा होटलों में ही शराब परोसने की अनुमति होगी।
बार मालिक एलिगेंट बिनॉय ने संवाददाताओं को बताया कि उच्च न्यायालय के इस फैसले से बार एसोसिएशन के सभी रास्ते बंद नहीं हुए हैं।
बिनॉय ने कहा, “गौर करने वाली बात यह है कि राज्य की शराब नीति एक वार्षिक कवायद है और इस नीति में अभी तीन महीने बाकी हैं। एक अप्रैल, 2016 से एक नई नीति लागू होगी, इसलिए हम इंतजार करेंगे और उससे पहले हम धरना भी देंगे एवं हमारे पास मौजूद अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार-विमर्श करेंगे।”
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री चांडी के नेतृत्व वाली केरल सरकार ने अगस्त 2014 में अपनी नई शराब नीति के हिस्से के रूप में घोषणा की थी कि सरकार ने राज्य में अगले 10 वर्षो के लिए पूर्ण शराबबंदी का निर्णय लिया है। सरकार ने इस क्रम में 710 बारों को बंद करने के लिए एक नोटिस जारी किया था।
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