खादी दिवस मनाने की उठ रही मांग

नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। महात्मा गांधी और आजादी से जुड़ी खादी अब एक नए कलेवर में लोगों के बीच मौजूद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन’ के जुमले ने युवाओं का ध्यान खादी की ओर खींचा है। आलम यह है कि अब ‘खादी दिवस’ मनाने की आवाजें भी उठने लगी हैं।

नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। महात्मा गांधी और आजादी से जुड़ी खादी अब एक नए कलेवर में लोगों के बीच मौजूद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन’ के जुमले ने युवाओं का ध्यान खादी की ओर खींचा है। आलम यह है कि अब ‘खादी दिवस’ मनाने की आवाजें भी उठने लगी हैं।

खाद्य एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने खादी को बढ़ावा देने और बुनकरों के मेहनताने को बढ़ाने के लिए कई कदम भी उठाए हैं और कई नए फैसलों को लेकर प्रयास भी किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने जब से देश के हर व्यक्ति से खादी का एक वस्त्र पहनने का आग्रह किया है, तब से खादी की बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिली है। साल 2015-16 में खादी ग्रामोद्योग की बिक्री 37,935 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि 2014-15 में यह 33,136 करोड़ रुपये ही थी।

खादी वस्त्रों की मांग पूरी करने के लिए बंद पड़ी संस्थाओं को दोबारा चलाने और नई संस्थाएं खोलने का काम हो रहा है। इसमें नए लोगों को भी जोड़ा जा रहा है।

हस्तनिर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में कल (रविवार) दूसरा ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ मनाया गया, जिसके साथ खादी की गूंज भी हर तरफ सुनाई दी।

केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रक्ता मीनाक्षी लेखी ने आईएएनएस को बताया, “मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों को खादी पहनने के लिए प्रेरित करती हूं। खादी को हर मौसम में पहना जा सकता है। अभी डिजाइनर रितु बेरी ने अपना खादी संग्रह भी पेश किया है जो युवाओं को खादी पहनने के लिए प्रेरित करेगा।”

देश में खादी को बढ़ावा देने वालों की भी कमी नहीं है। इस दिशा में खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज लवर्स एसोसिएशन (कवीला) संस्था बुनकरों के लिए एक प्लेटफॉर्म मुहैया कराती है, जहां बुनकर अपने उत्पादों को बेच सकते हैं।

इस संस्था के अध्यक्ष प्रवीण मित्तल ने आईएएनएस को बताया, “हम बुनकरों और ग्राहकों के बीच की कड़ी के रूप में काम करते हैं। हम खादी के उत्पादन में भी हैं। हमारा मकसद खादी को देश के हर शख्स तक पहुंचाना है।”

खादी को लोकप्रिय बनाने और इसे बढ़ावा देने के लिए खादी दिवस की भी मांग उठ रही है।

कविला के अध्यक्ष कहते हैं, “खादी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए खादी दिवस की घोषणा की जानी चाहिए। हम बहुत जल्द इस संबंध में एक प्रस्ताव सरकार को भेजेंगे।”

केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने आईएएनएस को बताया, “खादी के बारे में लोगों की जानकारी कम है। युवा पर्यावरण को लेकर सचेत हैं और उन्हें यह पता है कि खादी पर्यावरण अनुकूल है। हथकरघा से एक मीटर खादी बनाने में सिर्फ तीन लीटर पानी की जरूरत पड़ती है, जबकि मशीन के जरिए बनाने में 30 लीटर पानी खर्च होता है।”

वह आगे कहते हैं कि खादी की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। खादी को कम लागत में तैयार कर बुनकरों को ज्यादा से ज्यादा मुनाफा पहुंचाने की योजना है।

खादी को युवाओं तक पहुंचाने के लिए खादी को फैशन से जोड़ा गया है। अब डिजाइनर भी खादी से जुड़ रहे हैं। प्रख्यात फैशन डिजाइनर रितु बेरी ने हाल ही में अपना खादी संग्रह लांच किया है। इसमें खादी के घाघरा, सूट, साड़ी वगैरह तैयार की गई है।

युवाओं के लिए ‘विचित्र वस्त्र’ नामक खादी की एक विशेष कुर्ती तैयार की गई है जिसे जींस, लैगिंग, जैगिंग सभी के साथ पहना जा सकता है।

खादी का अब तक कुर्ते और पाजामा में इस्तेमाल होता आया है, लेकिन अब इसे जींस और गाउन के रूप में पेश किया गया है। खादी को स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में ड्रेस के रूप में भी इस्तेमाल में लाने के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं। कुछ स्कूलों ने और यहां तक कि आईआईटी-बॉम्बे ने भी खादी को अपनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने भी सोशल मीडिया पर ‘आईवियर हैंडलूम’ अभियान की शुरुआत कर हथकरघा निर्मित परिधानों को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करने की कोशिश की है।

खादी को नेताओं और गरीबों का कपड़ा माना जाता रहा है, लेकिन खादी प्रेमियों और इसे बढ़ावा देने वालों ने अमीरों में भी खादी को लेकर दीवानगी पैदा करने का संकल्प लिया है।

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