जम्मू/श्रीनगर, 25 जनवरी (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर में गुरुवार को गणतंत्र दिवस से पहले सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
कश्मीर घाटी में साल 1990 में सश्सस्त्र अलगाववादी संघर्ष शुरू होने बाद से विगत 27 वर्षो से गणतंत्र दिवस मनाने के लिए भारी तनाव रहता है।
एक ओर जहां सुरक्षा एजेंसियां अलगाववादियों को सरकारी कार्यक्रमों में बाधा उपस्थित करने से रोकने के लिए उनकी सुरक्षा चौकसी बढ़ा देती हैं, वहीं आतंकवादी अपनी उपस्थिति महसूस कराने के लिए सुरक्षा इंतजाम में कमियां ढूढ़ने की तलाश में रहते हैं।
गणतंत्र दिवस पर मुख्य ध्वजारोहण समारोह और परेड का आयोजन जम्मू के मौलाना आजाद स्टेडियम में होगा, जहां राज्यपाल एन.एन. वोहरा परेड की सलामी लेंगे।
पाकिस्तान की ओर से आतंकियों के घुसने के किसी प्रयास को रोकने के लिए जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है।
सुरक्षा बलों की तैयारियों का जायजा लेने के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक एस.पी. वैद्य रात में स्वयं जम्मू शहर में गश्त लगा रहे हैं।
राज्य में परेड स्थलों या संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर आतंकवादी हमलों को विफल करने के लिए सेना, अर्ध सैनिक बल और पुलिस के त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे बनाए गए हैं।
कई शहरों में अधिकांश जगहों पर अस्थाई फाटक बनाए गए हैं और घेराबंदी की गई है।
निजी और यात्री वाहनों को रोका जा रहा है और आगे जाने की मंजूरी देने से पहले सवारियों की सघन तलाशी ली जा रही है।
इस तरह की चौकियां राज्य की दोनों राजधानी जम्मू और श्रीनगर शहर के प्रवेश स्थलों पर बनाई गई हैं।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को सूचना मिली है कि गत साल कश्मीर घाटी में अशांति की पृष्ठभूमि में 26 जनवरी के आसपास अपनी उपस्थिति महसूस कराने की आतंकवादियों की योजनाएं हैं।
अधिकारी ने भी कहा कि इस साल सुरक्षा तैयारी अधिक है, क्योंकि साल 2014 और 2015 की तुलना में नियंत्रक रेखा के पार से राज्य में आतंकवादियों की अधिक घुसपैठ हुई है।
उत्तरी कश्मीर के गांदरबल जिले में मंगलवार को लश्कर-ए-तैयबा के दो विदेशी आतंकवादी सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए थे।
सुरक्षा बलों का मानना है कि मारे गए आतंकवादियों- अबू अनस और अबू अली की 26 जनवरी के आसपास श्रीनगर शहर में आत्मघाती आतंकी हमले की योजनाएं थीं।
इस तरह की किसी घटना से निपटने के लिए सुरक्षा बलों ने त्वरित प्रतिक्रिया आतंकवाद विरोधी टीमें तैनात की हैं।
कश्मीर घाटी के सभी जिला मुख्यालयों में ध्वाजारोहण और औपचारिक परेड होंगे, जबकि बड़ा कार्यक्रम श्रीनगर के बक्शी स्टेडियम में होगा।
सुरक्षा बलों ने गणतंत्र दिवस से पहले स्टेडियम को अपने कब्जे में ले लिया है और लोगों के प्रवेश इलेक्ट्रोनिक रूप से मानवयुक्त अभिगम नियंत्रण प्रणाली के जरिए विनियमित किए जाते हैं।
व्यस्त चौराहों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों के आसपास अनुकूल जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तथा उंची इमारतों पर खोजी कुत्ते और तेज निशानेबाज तैनात किए गए हैं। इस तरह के उपाय राज्य में सरकारी कार्यक्रमों की चाक चौबंद सुरक्षा के लिए किए गए हैं।
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