न्यूयॉर्क, 7 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गरीबी उनके जीवन की पहली प्रेरणा थी और इसी से उन्हें जीवन में गरीबों के लिए कुछ करने का जज्बा मिला।
‘टाइम’ पत्रिका को दिए साक्षात्कार में जब मोदी से पूछा गया कि उन्हें सबसे ज्यादा क्या प्रभावित करता है तो मोदी ने अपने गरीबी भरे शुरुआती दिनों को याद किया।
उन्होंने कहा, “मैं एक बेहद निर्धन परिवार में जन्मा हूं। जब मैं बच्चा था तो रेल के डिब्बों में चाय बेचा करता था। मेरी मां जीवन यापन के लिए बर्तन धोया करती थीं और दूसरों के घर में घरेलू काम किया करती थीं।”
बीते साल मई में देश के प्रधानमंत्री बने मोदी ने कहा, “मैंने गरीबी को बहुत करीब से देखा है। मैं गरीबी में रहा हूं। एक बच्चे के रूप में मेरा पूरा बचपन गरीबी में डूबा रहा। मेरे लिए गरीबी एक तरह से मेरे जीवन की पहली प्रेरणा है। इसी से मुझे गरीबों के लिए कुछ करने का जज्बा मिला।”
उन्होंने कहा, “मैंने फैसला कर लिया कि मैं अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जिऊंगा और उनके लिए काम करूंगा।”
मोदी ने कहा, “गरीबी में बड़े होने के मेरे अनुभव ने मेरे बचपन को बहुत प्रभावित किया। फिर 12-13 साल की उम्र में मैंने स्वामी विवेकानंद के कामकाज को पढ़ना शुरू किया।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे उन्हें हिम्मत और नजरिया मिला और वह अधिक संवेदनशील बने। इसके साथ ही उन्हें नई दृष्टि और दिशा मिली।
उन्होंने कहा, “15-16 की उम्र में मैंने अपने जीवन को दूसरों को समर्पित करने का फैसला कर लिया और तब से लेकर आजतक मैं उसी फैसले का अनुसरण कर रहा हूं।”
dharmpath.com dharmpath