गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में 24 दोषी, 36 बरी, जाकिया ने कहा ‘अधूरा न्याय’ (राउंडअप)

अहमदाबाद, 2 जून (आईएएनएस)। अहमदाबाद की एक विशेष सत्र अदालत ने गुरुवार को 14 साल पुराने गुलबर्ग सोसाइटी में 69 लोगों के सामूहिक हत्याकांड में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता अतुल वैद्य सहित 24 लोगों को दोषी करार दिया। इस नरसंहार के शिकार कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने इसे ‘अधूरा न्याय’ बताया है।

अहमदाबाद, 2 जून (आईएएनएस)। अहमदाबाद की एक विशेष सत्र अदालत ने गुरुवार को 14 साल पुराने गुलबर्ग सोसाइटी में 69 लोगों के सामूहिक हत्याकांड में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता अतुल वैद्य सहित 24 लोगों को दोषी करार दिया। इस नरसंहार के शिकार कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने इसे ‘अधूरा न्याय’ बताया है।

विशेष सत्र अदालत के न्यायाधीश पी.बी. देसाई ने 66 आरोपियों में से 36 को बरी कर दिया।

जाकिया जाफरी इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले गई थीं। उन्होंने इस फैसले पर दुख जताते हुए कहा है कि यह ‘अधूरा न्याय’ है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के खिलाफ वे गुजरात उच्च न्यायालय में अपील करेंगी।

अदालत ने 24 आरोपियों को दोषी करार दिया जिसमें से 11 पर धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया गया, जबकि 13 अन्य आरोपियों को कम अपराध का दोषी पाया गया। अतुल वैद्य को धारा 436 के तहत अन्य आरोपियों के साथ घरों और दुकानों को जलाने तथा हमला करने के कम अपराध का दोषी करार दिया गया। कांग्रेस के पूर्व पार्षद मेह सिंह चौधरी भी दोषियों में शामिल हैं।

जिन आरोपियों को बरी किया गया, उनमें भारतीय जनता पार्टी के पार्षद बिपिन पटेल और मेघानिननगर के पुलिस निरीक्षक के. जी. एर्दा का नाम शामिल है। उन्होंने ही इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन बाद में कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में उन्हें भी आरोपियों में शामिल किया गया।

पटेल असारवा वार्ड के वर्तमान पार्षद हैं। वे 2002 में भी पार्षद थे, जब यह हत्याकांड हुआ।

27 फरवरी 2002 को हिन्दू श्रद्धालु मुसाफिरों से भरी साबरमती ट्रेन को गोधरा स्टेशन के नजदीक आग के हवाले कर दिया गया जिसमें 59 मुसाफिरों की मौत हो गई। इसके एक दिन बाद ही गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार को अंजाम दिया गया।

पटेल ने 2015 में लगातार चौथी बार पार्षद का चुनाव जीता था।

अदालत ने इस मामले में अभियोजन पक्ष के साजिश के आरोप को खारिज कर दिया।

बचाव दल के वकीलों में से एक अभय भारद्वाज ने बताया, “अदालत ने हमारे साजिश नहीं होने के तर्क को स्वीकार किया। यही कारण है कि उन्होंने अभियोजन पक्ष के साजिश के आरोप को खारिज किया। न्यायाधीश ने कहा कि इसमें कोई साजिश नहीं थी। उन्होंने अभियोजन पक्ष से कहा कि वे सबको साथ में न जोड़े और एक-एक आरोपी के बारे में बताएं कि किसने क्या किया। इस तरह अभियोजन पक्ष का साजिश का आरोप खारिज हो गया।”

28 फरवरी, 2002 में अहमदाबाद शहर के मेघानीनगर इलाके में गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी को हथियारबंद भीड़ ने दिनदहाड़े आग लगा दी थी, जिसमें कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोगों की मौत हो गई थी। सोसाइटी में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते थे।

आगजनी की इस घटना के बाद सोसाइटी के अंदर से 39 जले शव बरामद हुए थे, जबकि घटना के बाद से लापता अन्य 30 लोगों को विशेष जांच दल (एसआईटी) ने घटना के 12 साल बाद मृत घोषित कर दिया। इन 30 लोगों का उस दिन के बाद कभी कोई सुराग नहीं लगा।

अदालत दोषियों को छह जून को सजा सुनाएगी।

दोषी ठहराए गए 24 में से 11 लोगों को अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया और अन्य 13 को इससे कमतर अपराधों का दोषी पाया।

सभी 60 आरोपी सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद थे, जबकि उनके परिजन बड़ी संख्या में अदालत परिसर में एकत्रित थे।

सर्वोच्च न्यायालय ने इस साल 22 फरवरी को विशेष सत्र अदालत को गुलबर्ग सोयाइटी संहार मामले में तीन माह के अंदर अपना फैसला सुनाने का निर्देश दिया था, जिसके बाद सत्र अदालत ने नियमित आधार पर मामले में सुनवाई की।

गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड 2002 के गुजरात दंगों के दौरान हुए नौ प्रमुख मामलों में से एक है, जिनकी जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी ने की।

एसआईटी ने इस मामले में 66 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से नौ पिछले 14 वर्षो से जेल में हैं, बाकी जमानत पर जेल से बाहर हैं।

कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की विधवा जकिया जाफरी ने गुरुवार को कहा कि वह गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड मामले में अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विशेष अदालत द्वारा बरी किए गए कई लोग साल 2002 में हुए दंगे में शामिल थे।

जाफरी ने कहा कि वह गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगी।

अहमदाबाद में संवाददाताओं से जाफरी ने कहा, “हम अंतिम सांस तक मुकदमा लड़ेंगे।”

उनके पास बचे विकल्प के बारे में पूछे जाने पर जाफरी ने कहा, “तीस्ता सीतलवाड़ तथा दिल्ली के एक मशहूर वकील के साथ मिलकर इस मुकदमे को लड़ना जारी रखेंगे।”

जाफरी ने यह भी कहा कि एक पार्टी के रूप में कांग्रेस ने मामले में कभी हस्तक्षेप नहीं किया।

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